नई दिल्ली। राजेश कुमार ने 2 अप्रैल 2026 को आरईसी लिमिटेड में निदेशक (वित्त) के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। यह नियुक्ति कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन के रूप में देखी जा रही है।
उनकी नियुक्ति को 25 मार्च 2026 को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने ऊर्जा मंत्रालय के प्रस्ताव पर मंजूरी दी थी। उन्हें पांच वर्षों के लिए इस पद पर नियुक्त किया गया है।
राजेश कुमार एक अनुभवी वित्त विशेषज्ञ हैं, जिन्हें सार्वजनिक क्षेत्र, विशेषकर ऊर्जा और अवसंरचना वित्तपोषण के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्हें लेखा, कराधान, ऑडिट, ट्रेजरी, परियोजना मूल्यांकन और नियामकीय अनुपालन का व्यापक ज्ञान है। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से वाणिज्य स्नातक हैं तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (CMA) की दोहरी पेशेवर योग्यता रखते हैं।
इससे पहले वे आरईसी लिमिटेड में कार्यकारी निदेशक (वित्त) के पद पर कार्यरत थे, जहां उन्होंने संस्थान की वित्तीय रणनीति और विकास में अहम भूमिका निभाई। उनके करियर में एक सीपीएसई में इंजीनियरिंग एवं कंसल्टेंसी क्षेत्र में लगभग एक दशक का अनुभव तथा आरईसी में 20 वर्षों से अधिक की सेवाएं शामिल हैं।
उन्होंने आरईसी पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (RECPDCL) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के रूप में भी कार्य किया है, जहां उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा, अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन परियोजनाओं और स्मार्ट मीटरिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण पहलों का नेतृत्व किया।
आरईसी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने टैक्स-एफिशिएंट हाइब्रिड बॉन्ड, एएए रेटिंग वाले परपेचुअल बॉन्ड, सीबीडीटी द्वारा अधिसूचित जीरो कूपन बॉन्ड और कैपिटल गेन बॉन्ड जैसे नवाचारों के माध्यम से संसाधन जुटाने की रणनीति को मजबूत किया। इससे निवेशकों का दायरा बढ़ा और उधारी की लागत में कमी आई।
उन्होंने मल्टीलेटरल फंडिंग, एसेट-लायबिलिटी प्रबंधन, ईएसजी परियोजनाओं और आईटी ट्रांसफॉर्मेशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जटिल कर मामलों के समाधान में उनके योगदान से कंपनी को उल्लेखनीय बचत हुई है।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब आरईसी सार्वजनिक क्षेत्र के एनबीएफसी में विस्तार और दक्षता बढ़ाने के लिए पुनर्गठन की प्रक्रिया में है। भारत के ऊर्जा परिवर्तन और अवसंरचना विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में उनकी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण साबित होगी।
