जबलपुर: जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी जल्द ही शुरू होने वाली है। इसके तहत गुणवत्ता जांच का काम निजी कंपनियों द्वारा किया जाता है, जबकि सर्वेयर नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों के निर्देशन में कार्यरत रहते हैं। विदित है कि पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि सर्वेयरों की तैनाती अक्सर उनके गृह क्षेत्र में या लगातार एक ही केंद्रों पर की जाती है। इस व्यवस्था के कारण स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की संभावना बढ़ जाती है। क्षेत्रीय पहचान और व्यक्तिगत संबंधों के चलते सर्वेयर दबाव में आ सकते हैं, जिससे गुणवत्ता जांच की निष्पक्षता प्रभावित होती है और गड़बड़ियों की आशंका बढ़ जाती है।
एक ही सर्वेयर की तैनाती पर लगे रोक
इस बार गेहूं उपार्जन से पहले यह जरूरी है कि तैनाती नीति में सुधार किया जाए। किसी भी सर्वेयर को उसके गृह क्षेत्र में जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए। जैसे कोई सर्वेयर पाटन का निवासी है तो उसे बरगी या सिहोरा जैसे अन्य क्षेत्रों में भेजा जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी समिति या केंद्र पर बार-बार एक ही सर्वेयर की तैनाती पर रोक लगाई जानी चाहिए। इस तरह की व्यवस्था खरीदी प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने में मदद करेगी और गड़बड़ियों को रोक सकेगी।
नीति में बदलाव से लगेगा गड़बड़ियों में अंकुश
उल्लेखनीय है कि प्रशासन उपार्जन नीति में बदलाव करता है तो गेहूं खरीदी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। खरीदी केंद्रों पर गुणवत्ता जांच निष्पक्ष तरीके से हो तो किसानों का विश्वास भी बढ़ता है। खरीदी शुरू होने से पहले अगर तैनाती नीति में सुधार होता है तो भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है, साथ ही खरीदी प्रक्रिया भा सुचारू रूप से चलेगी।
