
रतलाम। यात्री सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में भारतीय रेल ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम ‘कवच’ को दिल्ली-मुंबई उच्च घनत्व नेटवर्क के नागदा-गोधरा खंड पर सफलतापूर्वक लागू कर दिया है।
रतलाम रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नम्बर 4 पर सोमवार दोपहर मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार व अन्य रेल अधिकारियों ने कवच प्रणाली से सुसज्जित लोकोमोटिव को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
लोकोमोटिव के प्रस्थान के साथ ही नागदा-गोधरा रेलखंड रतलाम मंडल का पहला ऐसा खंड बन गया, जहां ‘कवच’ पूरी तरह कार्यरत हो गया है। इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक (इंफ्रास्ट्रक्चर) अक्षय कुमार, (ऑपरेशन) कुंजीलाल मीना सहित कई अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
यह 224 रूट किलोमीटर लंबा रेलखंड है, जिसमें 154 किमी रतलाम मंडल और 70 किमी वडोदरा मंडल में आता है। इस परियोजना के तहत 41 लैटिस टॉवर, 39 स्टेशन कवच यूनिट्स, 606 किमी ऑप्टिकल फाइबर, 6000 आरएफआईडी टैग्स और 90 लोकोमोटिव में कवच यूनिट्स स्थापित किए गए हैं। रतलाम मंडल में ही 28 टॉवर, 27 स्टेशन यूनिट्स और 4000 टैग्स लगाए गए हैं।
डीआरएम अश्वनी कुमार ने कहा कि ‘कवच’ भारतीय रेल के शून्य दुर्घटना लक्ष्य की दिशा में अहम कदम है। आने वाले तीन महीनों में शेष 78 किमी खंड पर भी इसे लागू करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे पूरा मार्ग और अधिक सुरक्षित व आधुनिक बन गया हैं।
9000 किमी से अधिक ट्रायल पूर्ण
जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार, कमीशनिंग से पहले प्रणाली का गहन परीक्षण किया गया। 9000 किमी से अधिक ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे करने के बाद इसे स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ता द्वारा प्रमाणित किया गया। ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विकसित ‘कवच’ प्रणाली सिग्नल पासिंग एट डेंजर को रोकने, ओवरस्पीडिंग नियंत्रण, टक्कर से बचाव, रियल-टाइम सिग्नल जानकारी और आपात स्थिति में एसओएस संदेश जैसी उन्नत सुविधाएं प्रदान करती है।
