सीधी: विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर इन्द्रवती नाट्य समिति सीधी ने बीते 22 वर्षों में रंगमंच और लोक कलाओं के क्षेत्र में अपनी समृद्ध और प्रेरणादायक यात्रा को साझा किया। यह संस्था न केवल बघेलखंड क्षेत्र में सांस्कृतिक चेतना का केन्द्र बनी है बल्कि अपने निरंतर प्रयासों के माध्यम से क्षेत्रीय रंगमंच को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने में भी सफल रही है।इन्द्रवती नाट्य समिति ने विंध्य क्षेत्र के सांस्कृतिक पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 365 ग्रामों में स्थापित लोककला ग्राम इसकी सबसे बड़ी और अनूठी पहलों में से एक है। इन ग्रामों के माध्यम से पारंपरिक लोक कलाओं, जनजातीय अनुष्ठानों, लोक जीवन शैली और सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण और पुनर्जीवन किया जा रहा है।
यह पहल न केवल सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य कर रही है बल्कि ग्रामीण और जनजातीय कलाकारों को एक सशक्त मंच प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित कर रही है। समिति की प्रमुख उपलब्धियों में नि:शुल्क आवासीय प्रस्तुति-परक राष्ट्रीय नाट्य कार्यशाला का विशेष स्थान है। इस कार्यशाला के माध्यम से अब तक देशभर के 1100 से अधिक रंग विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। ये प्रशिक्षित विद्यार्थी आज रंगमंच, सिनेमा और टेलीविजन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं और अपनी प्रतिभा के माध्यम से सीधी जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित कर रहे हैं। आज इन्द्रवती नाट्य समिति एक व्यापक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुकी है जिसके साथ 21000 से अधिक रंगकर्मी और लोक कलाकार जुड़े हुए हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि संस्था ने किस प्रकार समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर जोडक़र सांस्कृतिक एकता और समृद्धि को बढ़ावा दिया है। यह मंच कलाकारों के लिए अभिव्यक्ति का माध्यम होने के साथ-साथ सांस्कृतिक संवाद का भी केन्द्र बन गया है।
वहीं विंध्य इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के माध्यम से सिनेमा और समाज के बीच एक सार्थक संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है जिससे नई पीढ़ी को रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर मिल रहा है। समिति के निदेशक नीरज कुंदेर, रोशनी प्रसाद मिश्र, शिवनारायण कुंदेर, रजनीश जायसवाल एवं प्रजीत कुमार साकेत के नेतृत्व और समर्पित प्रयासों के कारण यह संस्था निरंतर प्रगति कर रही है। उनके मार्गदर्शन में इन्द्रवती नाट्य समिति एक साधारण सांस्कृतिक संगठन से आगे बढक़र एक सशक्त सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में स्थापित हो चुकी है। जनजातीय पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के सहयोग से अनूपपुर एवं सीधी जिलों के बकवा, बीजापुरी, ऊमर गुहान और पोडक़ी ग्रामों में होम-स्टे विकसित किए जा रहे हैं। ये होम.स्टे न केवल पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, परंपरा और जनजातीय जीवन का वास्तविक अनुभव प्रदान करेंगे बल्कि उन्हें स्थानीय कला और परंपराओं से भी सीधे जोड़ेंगे। इस पहल से जहां एक ओर जनजातीय पर्यटन को नई दिशा मिलेगी वहीं दूसरी ओर जनजातीय कलाओं को वैश्विक पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
महोत्सव से कलाकारों को दिया गया बढ़ावा
समिति के कलाकारों को संस्कृति संसाधन एवं प्रशिक्षण केन्द्र नई दिल्ली द्वारा नेशनल स्कॉलरशिप एवं जूनियर फेलोशिप से सम्मानित किया जाना उनकी उत्कृष्टता और समर्पण का प्रमाण है। यह सम्मान न केवल कलाकारों के लिए गर्व का विषय है बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। इसके अतिरिक्त समिति द्वारा आयोजित 111 दिवसीय महाउर कला महोत्सव ने स्थानीय स्तर पर कला के प्रति नई जागरूकता उत्पन्न की है। इस महोत्सव के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों को एक मंच पर लाकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया गया है।
रंगकर्मियों ने राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर बनाई विशिष्ट पहचान
समिति के रंगकर्मियों ने नीरज कुंदेर एवं रोशनी प्रसाद मिश्र के निर्देशन में भारत रंग महोत्सव, थिएटर ओलम्पिक सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में भाग लेकर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इसके अतिरिक्त आदिरंगम, आदिपर्व, देशज, भारत पर्व और जनजातीय महोत्सव जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में सहभागिता कर सीधी जिले की सांस्कृतिक धरोहर को देश-विदेश तक पहुंचाया है।
