
जबलपुर। उमरिया जिले के नेशनल पार्क बांधवगढ़ में एक समाजसेवी समिति द्वारा अवैध गतिविधियां किये जाने का आरोप लगाते हुए मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। दायर मामले में कहा गया है कि रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में वन्य जीवों से संबंधित अन्य गतिविधियां संचालित किया जाना नियमों के खिलाफ है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है। युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को निर्धारित की है।
यह जनहित का मामला उमरिया के मानपुर निवासी राजनारायण भट्ट की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता अनिल कुमार द्विवेदी ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि नेशनल पार्क बांधवगढ़ के कोर एरिया में संत रविदास संभागीय समाज सेवा समिति द्वारा अनुमति लेकर जंगल में सोशल व कल्चर एक्टिविटीज की जा रहीं है। इतना नहीं आरोप है कि उक्त कार्य के साथ ही वहां कुछ निर्माण कार्य भी किया जा रहा है, जो कि अनुचित है। आवेदक का कहना कि वन्य जीव अधिनियम की धारा-2 के तहत रिजर्व फारेस्ट एरिया में केवल वन्य जीव से संबंधित गतिविधियां ही संचालित हो सकती है, लेकिन इसके बावजूद वहां अन्य अवैध गतिविधियां की जा रहीं है, जिसकी शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई। मामले में प्रमुख सचिव राजस्व विभाग, सचिव फारेस्ट, कलेक्टर उमरिया, सीसीएफ भोपाल, रीजनल डायरेक्टर बांधवगढ़, डीएफओं उमरिया, नगर पालिका मानपुर व संत रविदास संभागीय समाज सेवा समिति को पक्षकार बनाया गया है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
