ईरान-अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष शांति वार्ता शुरू, राष्ट्रपति ट्रंप का दावा- ‘जंग जीत चुके हैं हम’, पाकिस्तान बना मध्यस्थ लेकिन कतर ने बातचीत से किया किनारा

वॉशिंगटन/तेहरान | ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष के 26वें दिन एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ पिछले दो दिनों में ‘बेहद सकारात्मक’ बातचीत हुई है और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य हमलों को अगले पांच दिनों के लिए रोकने का निर्णय लिया है। युद्ध को समाप्त करने के लिए वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पाकिस्तान व अन्य मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष संवाद शुरू हो गया है। ट्रंप ने इस संवेदनशील मुद्दे पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ सहित कई वैश्विक नेताओं से चर्चा की है। हालांकि, इस शांति प्रक्रिया में कतर ने शामिल होने से स्पष्ट इनकार कर दिया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र की राजनीति में नया मोड़ आ गया है।

एक ओर जहां शांति की बातें हो रही हैं, वहीं ईरान के भीतर असंतोष और युद्ध की आग अब भी धधक रही है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने ट्रंप के दावों को ‘फर्जी खबर’ करार देते हुए कहा कि ये केवल तेल की कीमतों को प्रभावित करने की एक चाल है। इस बीच, ईरान ने अपनी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पूर्व प्रमुख अली लारीजानी की हवाई हमले में मौत के बाद मोहम्मद बाकर जालघाद्र को परिषद का नया सचिव नियुक्त किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूस, तुर्की और पाकिस्तान सहित कई देशों के अपने समकक्षों से संपर्क साधकर सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की है। व्हाइट हाउस ने इन कूटनीतिक वार्ताओं को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए मीडिया में अधिक जानकारी साझा करने से फिलहाल मना कर दिया है।

युद्ध के इन हालातों के बीच भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर अच्छी खबर है। दो भारतीय एलपीजी वाहक जहाज, ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’, जो लगभग 92,612 मीट्रिक टन गैस लेकर आ रहे हैं, सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर चुके हैं। इन जहाजों के 26 से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है, जिससे देश में ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। हालांकि, खाड़ी देशों को अब भी ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। मिस्र और ओमान जैसे देश भी अमेरिकी दूतों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि इस क्षेत्रीय तनाव को कम किया जा सके और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे इसके बुरे प्रभावों को रोका जा सके।

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