न्यूयॉर्क/तेहरान | ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन को औपचारिक रूप से सूचित किया है कि वह अब ‘गैर-दुश्मन’ जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने की अनुमति देगा। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में पैदा हुई भारी बाधाओं के बीच यह एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। न्यूयॉर्क स्थित ईरानी मिशन ने स्पष्ट किया है कि जो देश ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य आक्रामकता में शामिल नहीं हैं, वे ईरानी अधिकारियों के साथ उचित समन्वय स्थापित कर इस रास्ते का उपयोग कर सकते हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका और इजराइल के साथ जारी युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
ईरानी रक्षा परिषद द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, होर्मुज से गुजरने की यह सुविधा केवल तभी मिलेगी जब जहाज पूरी तरह से घोषित सुरक्षा नियमों का पालन करेंगे। तेहरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या ईरानी क्षेत्र के खिलाफ समर्थन देने वाले जहाजों को दुश्मन माना जाएगा और उन्हें रास्ता नहीं दिया जाएगा। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल चोकपॉइंट है, जहाँ से वैश्विक कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ईरान के बिजली संयंत्रों या ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर फिर से हमला हुआ, तो इसका ‘विनाशकारी’ जवाब दिया जाएगा।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला बयान देते हुए दावा किया है कि अमेरिका ने यह युद्ध लगभग जीत लिया है। होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी के शपथ ग्रहण समारोह में ट्रंप ने कहा कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और संचार साधन लगभग पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान अब समझौता करने के लिए बेताब है क्योंकि उसकी सैन्य शक्ति क्षीण हो चुकी है। हालांकि, ईरान के इन ताजा कूटनीतिक कदमों और अमेरिका के दावों के बीच, दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे किसी बड़े समझौते की संभावना भी तलाशी जा रही है। वैश्विक समुदाय की नजरें अब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर टिकी हैं।

