अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी मिसाइल साइटों पर 5,000 पाउंड के गहरे भेदक बम गिराए, ताकि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सुरक्षित रहे और ईरानी खतरों को निष्क्रिय किया जा सके।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घोषणा की है कि कुछ घंटे पहले अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी तट पर स्थित मिसाइल ठिकानों पर हमला किया। CENTCOM के मुताबिक, इन ठिकानों पर तैनात ईरानी एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही थीं। अमेरिकी सेना ने इन ठिकानों पर 5,000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया।
CENTCOM ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित और निर्बाध शिपिंग सुनिश्चित करना है। अमेरिका ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि ईरान और इजरायल के हमलों के बाद खतरा बढ़ गया था। ईरान ने इससे पहले यह दावा किया था कि उसने होर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं किया है और केवल अमेरिका और इजरायल के जहाजों के लिए खतरा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में डर का माहौल
हालांकि, डर के कारण कई अंतरराष्ट्रीय जहाज इस जलडमरूमध्य से गुजरने से बच रहे हैं। सेटेलाइट तस्वीरों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि कई जहाज खड़े होकर संभावित हमलों का इंतजार कर रहे हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के कई देशों से होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल होने के लिए कहा था। जिसे लगभग सभी देशों ने नाकार दिया।
क्या है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जो ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थित संकरे समुद्री गलियारे के माध्यम से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा निर्यात सुनिश्चित करता है। भारत सहित कई देश इसी मार्ग पर अपनी ऊर्जा आपूर्ति निर्भर करते हैं।
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पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी और युद्ध विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर के अनुसार, इस जलमार्ग के पास जमीन के नीचे बनी मिसाइल साइट, ड्रोन या बोट के भंडारण स्थल जैसे खतरे हमेशा मौजूद रहते हैं। उनका कहना है कि इन खतरों को हटाना आवश्यक है, अन्यथा यह क्षेत्र लंबे समय तक अस्थिर रह सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान की ऑपरेशन क्षमता के कारण संघर्ष महीनों तक लंबा खिंच सकता है। इस हमले के बाद अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि उनका मुख्य लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाना है, ताकि वैश्विक बाजार पर इसके असर को कम किया जा सके।
