
सिंगरौली । देवसर के माड़ीबांध से हर्राचंदेल नहर पर कच्ची सड़क का निर्माण कराए जाने का मामला काफी गरमा गया। नवभारत में 22 जून को प्रकाशित खबर पर आज एसडीएम सौरभ मिश्रा समेत जल संसाधन विभाग के एसडीओ रत्ना द्विवेदी व राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारी कार्य स्थल पर पहुंच जायजा लिया। जहां पता चला कि ग्राम पंचायत के द्वारा बगैर तकनीकि एवं प्रशासकीय स्वीकृति कार्य कराया जा रहा है। हालांकि कार्य कराने से नही रोका, लेकिन भूमि स्वामियो की सहमति आवश्यक किया है।
ज्ञात हो कि जनपद पंचायत देवसर के क्षेत्र के हर्राचंदेल में माड़ी जलाशय के सिचाई नहर को ध्वस्त कर पंचायत प्रतिनिधियों के मौजूदगी में कच्ची सड़क का नव निर्माण कार्य कराया जा रहा है। जहां स्थानीय किसानों ने इसका विरोध किया और कहा कि जब नहर को ही ध्वस्त कर दिया गया है,तो फिर खेतो में पानी कैसे पहुंचेगा। यह मामला काफी तूल पकड़ा और नवभारत ने प्रमुखता के साथ खबर को प्रकाशित किया। जहां आज एसडीएम देवसर और राजस्व अमला के साथ-साथ जल संसाधन विभाग के एसडीओ स्थल पहुंच जांच पड़ताल कर जायजा लिया। इस दौरान प्रशासन ने माना कि सिचाई नहर पर सड़क बनाई जा रही है, जो गलत है। उसी दौरान यह भी जानकारी मिली कि बिना टीएस एवं एएस के ही कार्य कराया जा रहा है। हालांकि इस दौरान पंचायत के प्रतिनिधियों पल्ला भी झाड़ लिया। सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर कार यह सड़क किसके द्वारा बनाई जा रही थी। सड़क की लम्बाई दूरी 500 मीटर बताई जा रही है। चर्चा है कि पंचायत के द्वारा सुनियोजित तरीके से यह कार्य कराया जा रहा था। मामला गरमाने के बाद अपने आप को बचाने के लिए इस तरह का बयान दिया है। वहीं एसडीएम एवं जल संसाधन विभाग ने कहा कि आपसी सहमति से ही सड़क का कार्य कराएं। नहर को ध्वस्त किया है तो, उसे ठीक करना पड़ेगा। फिलहाल कार्यस्थल पर अधिकारियों के पहुंचने के बाद मामला कुछ हद तक शांत हुआ।
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ृ15 जून से मिट्टी का कार्य बंद, फिर मनमानी
आरोप लगाया जा रहा है कि 15 जून से मिट्टी से जुड़े निर्माण कार्यो को सरकार के द्वारा ही बंद करा दिया जाता है। इसके बावजूद हर्राचंदेल में कच्ची सड़क का कार्य कराया जा रहा था और उसमें भी बगैर किसी एएस एवं टीएस के। चर्चा है कि पंचायत ने तो अपना पल्ला झाड़ लिया। फिर सवाल उठाया जा रहा है कि इतना दानवीर कौन है, जो 500 मीटर लम्बी सड़क का निर्माण कार्य करा रहा है। भंडाफोड़ होने के बाद मामला सामने आ गया। नही तो पुरानी तिथियों में यानी 15 जून के पहले एएस एवं टीएस कराकर 15वें वित्त के मद से कार्य मंजूरी दिखा कर खेला कर लिया जाता। परंतु अब पंचायत के सामने कुछ कठिनाइयां भी आ सकती हैं।
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इनका कहना
पंचायत से जानकारी ली गई, जिसमें बताया गया है कि बिना तकनीकि एवं प्रशासकीय स्वीकृति के कार्य कराएं जा रहे थे। यह कार्य किसी निजी व्यक्ति के द्वारा कराया जा रहा है। यदि पंचायत के द्वारा कार्य कराने की शिकायत मिलेगी तो नियमानुसार कार्रवाई की जावेगी।
संजीव तिवारी
सीईओ जनपद पंचायत, देवसर
