
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विनय सराफ की एकलपीठ ने आर्मी आफिसर के विरुद्ध दुष्कर्म की एफआईआर निरस्त करने का आदेश दिये है। एकलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आपसी सहमति से संबंध बने थे, बाद में दबाव बनाने की नीयत से एफआईआर दर्ज कराई गई। चूंकि प्रकरण सहमति का है, अत: अपराध की परिधि में नहीं आता। इससे साफ है कि जब दोनों के बीच रिश्ते में खटास आई, तब शिकायतकर्ता ने आर्मी आफिसर पर रिश्ता जारी रखने का दबाव बनाने के लिए यह एफआईआर दर्ज कराई।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि 13 साल तक चले लंबे और निरंतर रिश्ते को देखते हुए यह मानना असंभव है कि शारीरिक संबंध केवल शादी के झूठे वादे के आधार पर बने थे। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा-69 यानी धोखे से शारीरिक संबंध बनाना और धारा 351(2) के तहत कोई सबूत नहीं मिला है। न्यायालय ने इसे कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए आर्मी आफिसर की वह याचिका स्वीकार कर ली, जिसके जरिए एफआईआर निरस्त किए जाने की प्रार्थना की गई थी।
यह है मामला-
दरअसल एफआईआर एक महिला पुलिसकर्मी द्वारा दर्ज कराई गई थी। जिसका आरोप था कि आर्मी आफिसर ने शादी का प्रलोभन देकर संबंध बनाए। वहीं आर्मी आफिसर की ओर से दलील दी गई कि दोनों के बीच 2012 से सबंध थे। दरअसल, 2012 में भोपाल की आर्मी कैंटीन में दोनों की पहली मुलाकात हुई और मोबाइल पर बातें शुरू हुईं। महिला का आरोप था कि आर्मी आफिसर ने खुद को कुंवारा बताया, लेकिन 2013 में पता चला कि वह शादीशुदा है। इसके बावजूद दोनों के बीच संबंध 2025 तक जारी रहे। आर्मी आफिसर ने भरोसा दिलाया था कि वह अपनी पत्नी से तलाक लेकर उससे शादी करेगा। 2025 में महिला को पता चला कि आर्मी आफिसर अन्य महिलाओं के भी संपर्क में था।। इसके बाद आर्मी आफिसर ने कथित तौर पर उसे धमकी दी, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
