
छतरपुर। पूरे देश की तरह छतरपुर शहर में भी रसोई गैस की किल्लत और वितरण व्यवस्था में आए बदलाव के कारण उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। शहर की विभिन्न गैस एजेंसियों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। हालात यह हैं कि घर का चूल्हा जलता रहे, इसके लिए वृद्ध, महिलाएं और स्कूली बच्चे तक भीषण गर्मी और तेज धूप में अपनी बारी का इंतजार करते नजर आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार हाल ही में कलेक्टर द्वारा गैस एजेंसी संचालकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि बिना डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड के सिलेंडर का वितरण नहीं किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के चलते सर्वर और ओटीपी संबंधी तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं, जिससे कई उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। कई घरों में गैस खत्म होने से चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं और लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
वहीं बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था को देखते हुए कुछ गैस एजेंसी संचालकों ने वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है। अब ग्राहकों की रजिस्टर में मैन्युअल एंट्री और हस्ताक्षर कराकर सिलेंडर दिए जा रहे हैं, ताकि जिन उपभोक्ताओं को तकनीकी कारणों से कोड नहीं मिल पा रहा है, उन्हें राहत मिल सके।
हालांकि भीषण गर्मी में घंटों लाइन में खड़े रहने वाले उपभोक्ताओं ने एजेंसी और प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि कतार में खड़े ग्राहकों के लिए न छाया की व्यवस्था है और न ही पीने के पानी की। कई बुजुर्गों को मजबूरी में बाहर से पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि किल्लत के दौरान कम से कम छाया और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
