देहरादून | भारत की नई न्यायिक और कानून प्रवर्तन प्रणाली को धरातल पर उतारने में उत्तराखंड ने देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के नवीनतम डैशबोर्ड के अनुसार, उत्तराखंड 93.46 के स्कोर के साथ हरियाणा और असम जैसे राज्यों को पछाड़कर नंबर वन बना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य ने इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS 2.0) के क्रियान्वयन में यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस सफलता के पीछे 23 हजार से अधिक पुलिस कर्मियों का गहन प्रशिक्षण और ‘न्याय श्रुति’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए वर्चुअल अदालती सुनवाई को बढ़ावा देना मुख्य आधार रहा है।
नए कानूनों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मुख्यमंत्री ने खुद कमान संभाली थी। शासन के शीर्ष अधिकारियों से लेकर फील्ड लेवल तक की गई निरंतर समीक्षा बैठकों के कारण तकनीकी बाधाओं को समय रहते दूर किया जा सका। राज्य ने ‘वन डेटा, वन एंट्री’ प्रणाली को अपनाकर पुलिस, ई-कोर्ट, ई-जेल और ई-फॉरेंसिक के बीच सूचनाओं के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित किया है। इससे न केवल कागजी कार्रवाई कम हुई है, बल्कि मुकदमों के त्वरित निस्तारण में भी तेजी आई है।
उत्तराखंड पुलिस अब देश के लिए स्मार्ट पुलिसिंग का एक बेंचमार्क बन गई है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के माध्यम से अपराध स्थल की अनिवार्य वीडियोग्राफी और डिजिटल साक्ष्यों के सुरक्षित संग्रहण ने राज्य की कानून व्यवस्था को आधुनिक बनाया है। पुलिस महानिरीक्षक सुनील कुमार मीणा के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उच्च स्तरीय बैठकों में उत्तराखंड की इस कुशलता की सराहना की है। रीयल-टाइम डेटा एंट्री और फॉरेंसिक मोबाइल वैन की उपलब्धता ने देवभूमि को तकनीकी रूप से सक्षम और सुरक्षित राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

