
भोपाल। रमजान का पवित्र महीना मुसलमानों के लिए इबादत, रहमत और बरकत का समय माना जाता है। इस महीने में दान यानी सदका और ज़कात का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इस्लाम में दान को आत्मिक शुद्धि, सामाजिक समानता और इंसानियत की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। मान्यता है कि रमजान में किए गए नेक कामों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान से गुनाहों की माफी और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है। साथ ही गरीब, यतीम, मिस्कीन और जरूरतमंद लोगों की सहायता कर उन्हें भी ईद की खुशियों में शामिल होने का अवसर मिलता है। ज़कात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है, जबकि सदका-ए-फित्र ईद की नमाज़ से पहले अदा किया जाता है।
रमजान में दान सामाजिक संतुलन, भाईचारे और मानवता के मूल्यों को मजबूत करने का संदेश भी देता है।
