
भोपाल। मध्यप्रदेश के दो प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि नए नियुक्त कर्मचारियों को सेवा के पहले तीन वर्षों में 70%, 80% और 90% स्टाइपेंड देने संबंधी नियम को निरस्त करने वाले हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील न की जाए।
मध्यप्रदेश मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ और मध्यप्रदेश निगम मंडल कर्मचारी महासंघ ने कहा कि इस फैसले के विरुद्ध अपील करना असंवेदनशील कदम होगा और इससे सरकार व कर्मचारियों के बीच संबंधों में अनावश्यक तनाव पैदा हो सकता है।
संघ के अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक और महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हस्तक्षेप कर अनावश्यक मुकदमेबाजी रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का निर्णय “समान कार्य के लिए समान वेतन” के सिद्धांत पर आधारित है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट में इससे राहत मिलने की संभावना बेहद कम है।
संगठनों ने वर्ष 2009 में सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें हर प्रतिकूल आदेश के खिलाफ अपील करने की प्रवृत्ति से बचने की सलाह दी गई थी। साथ ही 2010 के राज्य सरकार के उस परिपत्र का हवाला दिया गया, जिसमें विभागों को जिम्मेदार वादकारी की भूमिका निभाने की बात कही गई थी। उन्होंने चेतावनी दी कि अपील करने से सरकार की कर्मचारी हितैषी छवि को नुकसान पहुंचेगा।
