हाईकोर्ट ने निरस्त किये अपीलीय कोर्ट के आदेश

जबलपुर: ट्रायल कोर्ट के द्वारा सुनवाई पूरी करने के बाद दी गयी सजा के खिलाफ अपील दायर की गयी थी। अपीलीय कोर्ट ने सुनवाई करते हुए अन्य व्यक्ति के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कार्यवाही के आदेश जारी किए थे। जिसके खिलाफ दायर की गयी याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस ए के सिंह ने अपीलीय कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया।
छिंदवाड़ा निवासी मोहम्मद नासिर कुरैशी की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था

कि ट्रायल कोर्ट ने कोमल सोलंकी को मध्य प्रदेश गोवंश प्रतिषेध अधिनियम, 2004 के सेक्शन 9 और मोटर व्हीकल एक्ट के सेक्शन 66 के साथ सेक्शन 192 के तहत 9 अप्रैल 2019 के तहत दोषी करार दिया था। जिसके खिलाफ कोमल सोलंकी ने अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई करते हुए एडिशनल सेशन जज ने मोटर मालिक याचिकाकर्ता के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के खिलाफ कार्यवाही के आदेश जारी कर दिये।

याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि ट्रायल कोर्ट आपराधिक प्रकरण की सुनवाई के दौरान साक्ष्य व सबूत रिकॉर्ड में आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के आदेश जारी कर सकता है। पुलिस द्वारा कोमल सिंह के खिलाफ दायर चार्जशीट में याचिकाकर्ता की भूमिका का जिक्र नहीं किया। ट्रायल के दौरान तीन गवाह पेश किये थे। उन्होने भी याचिकाकर्ता की भूमिका का कोई उल्लेख नहीं किया।
एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि एडिशनल सेशंस जज का आदेश बरकरार नहीं रखा जा सकता। यह एक ऐसा सिद्धांत है जो आपराधिक न्यायशास्त्र में अनजान है और इसलिए इसे बनाए नहीं रखा जा सकता। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता ए उस्मानी ने पैरवी की।

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