नई दिल्ली | ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने चेतावनी जारी की है कि इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की प्रतिक्रिया में भारत के कुछ हिस्सों में हिंसा भड़क सकती है। राज्यों को भेजे गए आधिकारिक पत्र में विशेष रूप से उन “ईरान समर्थक कट्टरपंथी उपदेशकों” की पहचान करने को कहा गया है जो भड़काऊ भाषणों के जरिए शांति व्यवस्था भंग कर सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे संदिग्ध गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखें ताकि नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के विरोध में आज 2 मार्च को कश्मीर घाटी में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने कश्मीर के कई हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट की गति को धीमा कर दिया है ताकि सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें न फैलें। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बता दें कि कश्मीर में लगभग 15 लाख शिया मुसलमान रहते हैं, जिनकी भावनाओं को देखते हुए सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियाँ तैनात की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन एहतियातन कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत जौनपुर, अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर जैसे शहरों में भी खामेनेई की मौत के विरोध में शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए हैं। लखनऊ के ऐतिहासिक इमामबाड़े पर हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हुए और इजराइली कृत्यों की कड़ी निंदा की। मुजफ्फरनगर में प्रदर्शनकारियों ने जुलूस निकालकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय युद्ध का असर भारत की आंतरिक सुरक्षा पर न पड़े, इसके लिए सभी संवेदनशील इलाकों में ड्रोन और सीसीटीवी के जरिए निगरानी बढ़ाई जा रही है और शांति समितियों के साथ संवाद किया जा रहा है।

