ब्रिजिशनगर। आदिवासी अंचल का प्रमुख पर्व भगोरिया हाट बाजार हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया. हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग इस पर्व में शामिल हुए और पूरे क्षेत्र में सांस्कृतिक रंगत बिखर गई. ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक वेशभूषा और गुलाल की रंगत ने माहौल को उल्लास से भर दिया.
इछावर क्षेत्र सहित सीहोर जिले के विभिन्न गांवों में इन दिनों भगोरिया हाट भर रहे हैं. बावरिया चोर, बिजीशनगर, लाडकुई, बिलकिसगंज, झागरिया, वीरपुर डैम और नादान जैसे ग्रामों में आयोजन हो रहे हैं. भगोरिया केवल एक मेला या बाजार नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान व परंपराओं का जीवंत प्रतीक है.
ब्रिजीशनगर के भगोरिया हाट बाजार में बड़ी संख्या में मिठाई, पान, खेल-खिलौनों और अन्य सामग्री की दुकानें सजीं. कई फीट ऊंचे झूले आकर्षण का केंद्र बने रहे, जहां युवा और बच्चे उत्साहपूर्वक झूलते नजर आए. पारंपरिक परिधान पहने युवक-युवतियां ढोल की थाप पर थिरकते दिखाई दिए. भगोरिया की विशेष परंपराओं जैसे हाथ पर नाम लिखना, पान और मिठाई खिलाना, एक-दूसरे को झूले में झुलाना और गुलाल उड़ाकर स्नेह व्यक्त करना आदि ने मेले की रौनक बढ़ा दी. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा भगोरिया को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का निर्णय सराहनीय है. इससे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षण मिलेगा और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुडऩे की प्रेरणा मिलेगी.
