नयी दिल्ली, 27 फरवरी (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिल्ली आबकारी नीति मामले में आरोपमुक्त किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
श्री मालवीय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अब तक के रिकॉर्ड और विभिन्न न्यायालयों की टिप्पणियों को देखते हुए यह आदेश ‘न्याय की विफलता’ जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने इस पूरे मामले की याद दिलाते हुए बिंदुवार उल्लेख किया।
श्री मालवीय के अनुसार, मनीष सिसोदिया को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 26 फरवरी 2023 को और बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 9 मार्च 2023 को 2021–22 की आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं के संबंध में गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आईपीसी और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरोप दर्ज किए गए थे।
श्री मालवीय ने कहा कि इस पर सीबीआई की विशेष अदालत ने जमानत से इनकार करते हुए कहा था कि सिसोदिया ने कथित साजिश में ‘सबसे महत्वपूर्ण और केंद्रीय भूमिका’ निभायी। उन्होंने कहा कि उस समय दिल्ली उच्च न्यायालय ने मई और जुलाई 2023 में जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए आरोपों को गंभीर प्रकृति का बताया था। उन्होंने 21 मई 2024 के विस्तृत आदेश में न्यायालय ने प्रथम दृष्टया टिप्पणियों में “सत्ता के दुरुपयोग” और “लोक विश्वास के उल्लंघन” जैसे शब्दों का उल्लेख किया। साथ ही फर्जी ईमेल के माध्यम से जनमत निर्माण, थोक मुनाफा अंतर पांच प्रतिशत से 12 प्रतिशत तक बढ़ाने, कैबिनेट टिप्पणी में विशेषज्ञ राय दबाने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट करने जैसे आरोपों पर चिंता जताई गई थी।
श्री मालवीय ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 30 अक्टूबर 2023 को जमानत खारिज करने के फैसले को बरकरार रखा था और कहा था कि 338 करोड़ रुपये के लेन-देन के प्रारंभिक साक्ष्य सामने आए हैं। हालांकि नौ अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने लंबी अवधि की हिरासत (17 माह), ट्रायल शुरू नहीं होने और अनुच्छेद 21 के तहत शीघ्र सुनवाई के अधिकार के आधार पर जमानत दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि जमानत को सजा नहीं बनाया जा सकता।
श्री मालवीय ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें कथित रूप से 2002.68 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान, लाइसेंसिंग मानकों के उल्लंघन और मुनाफा अंतर में अनुचित वृद्धि की बात कही गई थी।
श्री मालवीय ने कहा कि इतने गंभीर न्यायिक अवलोकनों और ऑडिट निष्कर्षों के बावजूद निचली अदालत द्वारा आरोपमुक्त करना आश्चर्यजनक है।
