भैंसवा धाम में पानी की टंकी बनी बीमारी की जड़? स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में तैनात

पड़ाना/ब्यावरा। पड़ाना कस्बा क्षेत्र के करीब आधा दर्जर गांवों के कई ग्रामीणों की एकाएक तबीयत बिगडऩे से क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई, विगत दिवस भैंसवा धाम स्थित मेले से लौटकर आने के बाद ग्राम मऊ, मंग्याखेड़ी, घट्टिया, कल्याणपुर, बीचपड़ी के ग्रामीणों की तबीयत बिगडऩा शुरु हुई. स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन का अमला प्रभावित गांवों में पहुंचा किंतु अभी भी तबीयत में पूरी तरह सुधार नहीं होने पर शुक्रवार को भी कई ग्रामीण उचित उपचार कराने सारंगपुर सिविल अस्पताल व अन्य जगहों पर पहुंचे.

गौरतलब है कि भैंसवा धाम स्थित मेले से लौटकर आने के बाद अधिकांशत: उल्टी दस्त और घबराहट की शिकायत होना शुरु हुई. इन गांवों में लगभग 100 लोगों के बीमार होने से अफरा-तफरी मच गई. जानकारी लगने पर स्वास्थ्य विभाग, प्रशासनिक अमला गांवों में पहुंचा तथा पीडि़तों का उपचार शुरु किया गया. इन गांवों में केम्प भी लगाए गये.

पानी में अधिक क्लोरीन की मात्रा का संदेह

प्राप्त जानकारी के अनुसार विभिन्न गांवों के बीमार ग्रामीणों के द्वारा भैंसवा धाम पर स्थित टंकी से पानी पीने, पानी पुरी व अन्य कुछ खाद्य सामग्री खाने की बात कही गई किंतु इनके द्वारा टंकी से पानी पीने की बात मुख्य तौर पर सामने आई. जिस तरह से ग्रामीणों को उल्टी दस्त, घबराहट की शिकायत हुई उसको देखते हुए यह बात सामने आ रही है कि शरीर में अधिक क्लोरिन की मात्रा होने पर इस तरह का प्रभाव होता है. संभवत: पानी की टंकी में पानी साफ करने जो क्लोरीन का उपयोग किया गया उसकी मात्रा निर्धारित से कहीं अधिक रही, इसके चलते उक्त पानी का उपयोग करने पर ग्रामीणों की तबीयत बिगडऩा शुरु हुआ.

तीसरे दिन हुई टंकी की सफाई

8 फरवरी को ग्रामीण भैंसवा धाम स्थित मेले में गये हुए थे. वहां से आने के बाद देर शाम से उनकी तबीयत बिगडऩा शुरु हुई, इसके बाद 9 तारीख को भी उल्टी दस्त, घबराहट की शिकायत हुई. इस मामले की जानकारी सामने आने पर 10 फरवरी को अमला पहुंचा तथा बीमार लोगों का उपचार करने के साथ ही भैंसवा धाम स्थित टंकी के पानी के सैम्पल लेकर उसकी सफाई की गई किंतु तब तक टंकी में क्लोरीन की मात्रा काफी कम होकर सामान्य हो चुकी थी.

मऊ निवासी नंदन सिंह के अनुसार शुक्रवार को सिविल अस्पताल सारंगपुर में मऊ गांव निवासी 12 से 15 लोग उपचार के लिए पहुंचे. जिनको उल्टी दस्त की शिकायत कम नहीं हो रही थी. गांव के राधेश्याम पिता बद्रीलाल, राम सिंह पिता चंदर सिंह, कोमलबाई पति रामसिंह, देवीका पिता रामसिंह, तनिका पिता राधेश्याम शुक्रवार को सारंगपुर अस्पताल में ईलाज कराने के लिए पहुंचे. उधर जिला महामारी नियंत्रक अधिकारी डा. महेन्द्रपाल सिंह के अनुसार बीमार ग्रामीणों की स्थिति में सुधार हो रहा है. स्थानीय स्तर पर एवं जिले में स्वास्थ्य विभाग का अमला बराबर निगरानी रखे हुए है.

अचानक बीमार होने से दहशत में लोग

एकाएक इतने गांवों में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने से लोग दहशतजदा है, किसी को कुछ समझ नहीं आया कि आखिरकार किस वजह से ऐसा हुआ है. हालांकि स्वास्थ्य विभाग का अमला गांवों पहुंचकर उपचार कर निगरानी रखे हुए है, फिर भी कुछ लोगों की तबीयत में पूरी तरह सुधार नहीं होने पर परिजन उनको अन्यत्र उचित उपचार के लिए ले जा रहे है. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अब बीमार लोगों की स्थिति बेहतर है, प्रभावित गांवों में बराबर नजर रखी जा रही है.

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