नयी दिल्ली, 27 फरवरी (वार्ता) चेन्नई में भारत की जिम्बाब्वे पर दमदार जीत के बावजूद फ़ाफ डु प्लेसी और अनिल कुंबले का मानना है कि मेजबान टीम अभी भी अहम क्षेत्रों में “भूमिकाओं की स्पष्टता” तलाश रही है। साथ ही भारत को एक बेहतर छठे गेंदबाज़ी विकल्प की भी जरूरत है।
इस जीत के बाद भारत की टी20 विश्व कप में संभावनाएं बरकरार हैं। उनका अगला मैच रविवार को वेस्टइंडीज के ख़िलाफ है। वेस्टइंडीज ने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ 254/6 का स्कोर बनाया था। दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ भी वे 83/7 से उबरकर 176 के स्कोर तक पहुंचे थे। इसका मतलब है कि भारत के लिए वर्चुअल क्वार्टर फ़ाइनल जैसा यह मुक़ाबला आसान नहीं होने जा रहा है।
भारत के पांच प्रमुख गेंदबाज अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, हार्दिक पांड्या और अक्षर पटेल हैं, जबकि शिवम दुबे छठे विकल्प के तौर पर गेंदबाज़ी कर रहे हैं। वहीं अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा और रिंकू सिंह ने भी इस विश्व कप में गेंदबाज़ी की है। हालांकि, दुबे के आंकड़े प्रभावशाली नहीं हैं। उन्होंने 9.2 ओवरों में 13.28 की इकॉनमी से 124 रन दिए हैं और पांच विकेट लिए हैं।
कुंबले ने ईएसपीएन क्रिकइंफो के टाइमआउट शो में कहा, “भारत ने पिछले विश्व कप के बाद से अपने बल्लेबाज़ों से थोड़ी गेंदबाज़ी कराई है, जो कि एक सही क़दम है। अगर आप पिछले 18 महीनों को देखें, तो तिलक वर्मा, अभिषेक शर्मा और शिवम दुबे ने गेंदबाज़ी की है। यहां तक कि रिंकू सिंह और सूर्यकुमार यादव ने भी हाथ घुमाया है। तो इस मायने में भारत के पास विकल्प हैं और यह अच्छी बात है। लेकिन सपाट पिच पर चुनौतियां भी होंगी। भारत आदर्श रूप से आठ बल्लेबाज़ों के साथ खेलना चाह रहा है, बजाय इसके कि सात बल्लेबाज़ और पांच विशेषज्ञ गेंदबाज लेकर उतरे।”
डु प्लेसी ने भी माना कि विपक्षी टीमें भारत के छठे गेंदबाज़ी विकल्प को संभावित दबाव बिंदु के रूप में देखेंगी। उन्होंने कहा कि रणनीतिक नजरिये से टीमें बुमराह और वरुण जैसे मुख्य खतरों को निष्क्रिय करने की कोशिश करेंगी और उन ओवरों का इंतज़ार करेंगी, जिन्हें वे कम खतरनाक मानती हैं। उन्होंने कहा, “अगर दुबे वाइड यॉर्कर या रक्षात्मक लाइन डाल रहे हैं, तो आप उन्हें निशाना बना सकते हैं।”
भारत ने हाल के मैचों में अपनी एकादश में भी बदलाव किए हैं। दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ उन्होंने अक्षर की जगह वॉशिंगटन सुंदर को शामिल किया ताकि एक दाएं हाथ का ऑफ स्पिनर जोड़ा जा सके। ज़िम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने संजू सैमसन को शामिल किया ताकि बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों से भरे शीर्ष क्रम को संतुलित किया जा सके।
इस क़दम से उन्हें तेज 24 रन मिले और इशान किशन को ओपनिंग से हटाकर नंबर 3 पर भेजा गया। वहीं तिलक को पहले पांच मैचों में नंबर 3 पर खेलने के बाद नंबर 6 पर भेजा गया। तिलक ने सिर्फ़ 16 गेंदों पर नाबाद 44 रन बनाकर ठीक वही किया, जो रिंकू करते हैं। उन्होंने भारत को 256 के मैच जिताऊ स्कोर तक पहुंचाया। हालांकि भूमिकाओं की स्पष्टता को लेकर बड़ा सवाल बना रहा।
डु प्लेसी ने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ मैच शुरू होने से पहले कहा, “विश्व कप से पहले जिस टीम की उन्होंने योजना बनाई होगी और अब जिस स्थिति में वे हैं, वह भूमिकाओं के नज़रिये से काफी अलग लगती है। शुरुआत में शीर्ष तीन में बाएं हाथ के बल्लेबाज होने वाले थे, लेकिन अब आपके पास संजू हैं, जो दाएं हाथ के बल्लेबाज़ हैं। भूमिकाओं में काफ़ी बदलाव हो रहे हैं और अगर आप उन टीमों को देखें जो अच्छा कर रही हैं, उनकी बल्लेबाज़ी क्रम काफ़ी तय है।”
कुंबले ने भी इसी बात को दोहराया और कहा कि भारत की लंबी बल्लेबाज़ी क्रम से जरूरी नहीं कि उनकी भूमिकाएं भी स्पष्ट तौर पर तय हों। उन्होंने कहा, “यह ऐसी चीज़ है, जिसे भारत सही तरह से संभाल नहीं पाया है। वे लम्बे बल्लेबाज़ी क्रम चाहते हैं। तिलक जैसे खिलाड़ी के साथ भूमिका की स्पष्टता नहीं है। वह पहले नंबर 3 पर और अब शायद 5, 4 या यहां तक कि 6 पर बल्लेबाज़ी कर सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि दूसरे छोर पर कौन बल्लेबाज़ी कर रहा है।”
