नयी दिल्ली, 26 फरवरी (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक मामले में 3.35 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति कुर्क की है। ईडी के नागपुर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सचिन शत्रुघ्न पांडे और उनके परिवार के सदस्यों की कुर्क की गई संपत्तियों में तीन व्यावसायिक दुकानें और दो भूखंड शामिल हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल 10.37 एकड़ है। पीएमएलए जांच नागपुर के धंतोली और सीताबल्डी पुलिस स्टेशनों में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत सचिन शत्रुघ्न पांडे और उनके सहयोगियों के खिलाफ उनकी कथित आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के लिए दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी। जांच में यह खुलासा हुआ कि सचिन शत्रुघ्न पांडे और उनकी पत्नी श्रीमती खुशी सचिन पांडे ने नागपुर में दो संपत्तियों में कोई हिस्सेदारी न होने के बावजूद, उन संपत्तियों को 2.5 करोड़ रुपये में बेचने के लिए शिकायतकर्ता अमित कोठारी के साथ जानबूझकर समझौता किया और 2.2 करोड़ रुपये नकद प्राप्त किए।
उन्होंने बताया कि बाद में जब शिकायतकर्ता के पक्ष में संपत्तियों को स्थानांतरित करने वाला बिक्री विलेख (डीड) निष्पादित नहीं किया गया, तो आरोपियों ने समझौता किया और 31 मार्च, 2013 तक पैसे वापस करने का वचन दिया। वे कथित तौर पर समझौते की शर्तों का पालन करने में विफल रहे और 2.2 करोड़ रुपये वापस नहीं किया और व्यक्तिगत लाभ के लिए राशि का दुरुपयोग किया। जांच में पता चला कि पांडे और उनके सहयोगियों ने चंद्रप्रकाश वाधवानी को उनकी कंपनी लूफ़्ट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से ‘स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट’ (एसबीएलसी) के जरिए बिना सुरक्षा या क्रेडिट के एक विदेशी संस्थान से 18 करोड़ रुपये का ऋण दिलाने का वादा कर प्रलोभन दिया। इस संबंध में उन्होंने कथित तौर पर ऋण की व्यवस्था के लिए शिकायतकर्ता से 1.2 करोड़ रुपये नकद एकत्र किए। आरोपियों ने न तो वादा किया गया ऋण दिलाया और न ही 1.2 करोड़ रुपये वापस किए तथा कथित तौर पर व्यक्तिगत लाभ के लिए राशि का दुरुपयोग किया।
पीएमएलए, 2002 के तहत जांच में यह स्थापित हुआ है कि मुख्य आरोपी पांडे एक आदतन अपराधी है, जिसने कथित तौर पर न केवल वर्तमान मामले में शिकायतकर्ताओं को बल्कि कई अन्य निर्दोष व्यक्तियों को भी विभिन्न झूठे वादों के माध्यम से धोखा दिया है। जांच से पता चला कि पांडे और उनके सहयोगियों द्वारा प्राप्त धन को आंशिक रूप से उनके नाम पर, साथ ही परिवार के सदस्यों और संबंधित संस्थाओं के नाम पर बनाए गए कई बैंक खातों में रखा था। कुल राशि में से 90 लाख रुपये कथित तौर पर पायनियर ग्रुप प्रोजेक्ट में आवासीय फ्लैटों की खरीद के लिए इस्तेमाल किये गये थे, 20 लाख रुपये उनके सहयोगी स्वर्णिम जयकुमार दीक्षित के बैंक खातों में आगे उपयोग के लिए स्थानांतरित किए गए थे तथा 70 लाख रुपये से अधिक का उपयोग नियमित व्यक्तिगत खर्चों को पूरा करने के लिए किया गया था। ईडी ने यह भी कहा कि शेष नकदी का एक हिस्सा सह-आरोपी श्रीमती पांडे के भारत और विदेशों में चिकित्सा उपचार के लिए उपयोग किया गया था, जबकि दूसरा हिस्सा एक अतिरिक्त अचल संपत्ति हासिल करने के लिए उपयोग किया गया था।
मामले में आगे की जांच जारी है।

