सोलन। हिमाचल प्रदेश के सोलन में आज उस समय असामान्य स्थिति बन गई जब राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन से उपजा विवाद दो राज्यों की पुलिस के आमने-सामने आने तक पहुंच गया। मामला युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और उन्हें दिल्ली ले जाने की कार्रवाई से जुड़ा है, जिसने अब कानूनी प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने बुधवार सुबह रोहड़ू क्षेत्र से युवा कांग्रेस के तीन नेताओं को हिरासत में लिया। इन पर राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एआई सम्मेलन 2026 के दौरान हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़े होने का आरोप है।
जब दिल्ली पुलिस की टीम हिरासत में लिए गए युवाओं को लेकर दिल्ली लौट रही थी, तभी धर्मपुर में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने वाहन को रोक लिया। राज्य पुलिस का आरोप था कि स्थानीय प्रशासन को पूर्व सूचना दिए बिना गिरफ्तारी की गई और आरोपियों को राज्य से बाहर ले जाने से पहले ट्रांजिट रिमांड भी नहीं लिया गया। इसके बाद हिरासत में लिए गए युवाओं को मुक्त करा लिया गया, जिससे दोनों पुलिस बलों के बीच तीखा टकराव देखने को मिला।
सूत्रों के अनुसार, हिरासत में लिए गए तीनों युवक मूल रूप से हिमाचल के निवासी नहीं बताए जा रहे हैं और वे रोहड़ू के एक रेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे। दिल्ली पुलिस ने वहां का विजिटर रजिस्टर भी जब्त किया है। हालांकि इन तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इस घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के ठहरने का बचाव करते हुए कहा कि विधिवत भुगतान कर आवास लेना कानूनन अपराध नहीं है। वहीं भाजपा नेताओं ने इसे राजनीतिक संरक्षण और राज्य संसाधनों के दुरुपयोग का मामला बताया है।
कुल मिलाकर, यह प्रकरण अब केवल विरोध-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्यों के बीच कानूनी प्रक्रिया और पुलिस अधिकार क्षेत्र को लेकर बहस का विषय बन गया है।
