वॉशिंगटन, 10 जून (वार्ता) फुटबॉल की दिग्गज टीमों में शुमार उरग्वे नौ जून को ‘साउथ अमेरिकन फुटबॉल डे’ के रूप में मनाता है। इसी दिन उसने स्विट्जरलैंड को हराकर ओलंपिक में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था और उसके ‘लोगो’ पर पहला स्टार मिला था। फुटबॉल में राष्ट्रीय टीमों के ‘लोगो’ के ऊपर स्टार होना आम बात हो गयी है, आमतौर पर ये स्टार बताते हैं कि टीम ने कितने फीफा वर्ल्ड कप जीते हैं। ब्राजील इस मामले में सबसे अधिक पांच स्टार के साथ शीर्ष पर हैं, उसके बाद जर्मनी और इटली के पास चार-चार और अर्जेंटीना के पास तीन स्टार हैं (अर्जेंटीना ने चार साल में एक बार होने वाले इस टूर्नामेंट का पिछला एडिशन जीता था)।
उरुग्वे जिसने केवल दो बार विश्वकप जीता है। उसने पहली बार 1930 में और दूसरी बार 1950 में यह प्रतियोगिता जीती थी। वह गर्व से अपने लोगो के ऊपर चार स्टार दिखाता है। ऐसा इसलिये है, क्योंकि उसकी टीम द्वारा पेरिस 1924 और एम्स्टर्डम 1928 ओलंपिक खेलों में जीते गये दो स्वर्ण पदक को भी इसमें शामिल करती हैं। वर्ष 1920 के एंटवर्प ओलंपिक खेल अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के लिए एक अहम मोड़ थे, खासकर टीमों की संख्या और कुल प्रतिस्पर्धा के मामले में। रजत पदक जीतने वाली स्पेनिश टीम ने कई बास्क खिलाड़ियों के साथ एक मजबूत टीम बनाई और एक संयुक्त क्षेत्रीय टीम तैयार की। इस टीम ने 1922 में अटलांटिक महासागर पार करके उरुग्वे और अर्जेंटीना के खिलाफ फ्रेंडली मैचों की एक सीरीज खेली।
दक्षिण अमेरिका में, उरुग्वे की टीम ने यूरोपीय टीम को हराया, जिससे उन्हें पूरे यूरोप का दौरा करने का न्योता मिला। इस छोटे से देश ने 1924 में ही इस ऑफर का फायदा उठाया और अपने दौरे को बढ़ाकर 1924 के पेरिस ओलंपिक खेलों में भी हिस्सा लिया और फाइनल में स्विट्जरलैंड को 3-0 से हराने के बाद उरुग्वे के ‘लोगो’ पर पहला स्टार सजा। यही वजह है कि नौ जून को कॉमेबॉल (दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल परिसंघ) द्वारा ‘दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। ओरिजिनल सीरीज ‘द वॉल्ट’ के एक एपिसोड के दौरान ओलंपिक संग्रहालय के क्यूरेटर जोसलिन ने कहा, ‘‘पेरिस 1924 में 22 टीमें शामिल थीं, जो आज के समय में जाने जाने वाले पहले असली अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट जैसा था।”
चार साल बाद, पहले स्टार के साथ दूसरा स्टार भी जुड़ गया, जब उरुग्वे ने अपना खिताब बरकरार रखा और एम्स्टर्डम 1928 में एक बार फिर फुटबॉल का गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने 17 टीमों की तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया और फाइनल में अर्जेंटीना को 2-1 से हराया।
वर्ष 1930 में आयोजित विश्वकप में 13 टीमें शामिल थीं। नौ अमेरिका से (उरुग्वे, ब्राज़ील, अर्जेंटीना, पेरू, बोलीविया, चिली, मैक्सिको, पैराग्वे और संयुक्त राज्य अमेरिका) और चार यूरोप से (फ्रांस, रोमानिया, यूगोस्लाविया और बेल्जियम)। तीस जुलाई को खेला गया फ़ाइनल मैच मेज़बान उरुग्वे और पड़ोसी प्रतिद्वंद्वी अर्जेंटीना के बीच हुआ, जो एक ‘प्लाटेन्स’ डर्बी मैच था। इस प्रतिद्वंद्विता के जोशीले स्वभाव को देखते हुए, हर हाफ़ में अलग-अलग गेंद का इस्तेमाल किया गया। पहले हाफ में, ब्यूनस आयर्स में बनी गेंद चुनी गयी। दूसरे हाफ में, मेजबानों द्वारा बनायी गयी स्थानीय गेंद का इस्तेमाल हुआ। हाफ़-टाइम तक अर्जेंटीना 2-1 से आगे था, लेकिन उरुग्वे ने दूसरे हाफ में बाज़ी पलट दी और 4-2 से जीत हासिल की, जिससे उनके क्रेस्ट पर एक शानदार तीसरा स्टार जुड़ गया। उरुग्वे को चौथा स्टार 1950 में मिला।

