
यरूशलेम। पीएम नरेंद्र मोदी ने आज इजराइल की संसद नेसेट को संबोधित करते हुए होलोकॉस्ट को मानवता के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया और कहा कि ऐसी त्रासदियों को दुनिया कभी भूल नहीं सकती। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद को किसी भी तरीके से उचित नहीं ठहराया जा सकता और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुटता आवश्यक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और इजराइल दोनों देशों ने आतंकवाद की पीड़ा झेली है, इसलिए दोनों राष्ट्र शांति, सुरक्षा और स्थिरता के महत्व को भलीभांति समझते हैं। उन्होंने दोहराया कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है और मानवता के खिलाफ अपराधों के प्रति शून्य सहिष्णुता होनी चाहिए।
मोदी ने क्षेत्रीय शांति और समृद्धि के लिए हर सकारात्मक प्रयास का समर्थन करने की बात कही। उन्होंने विशेष रूप से गाजा में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में चल रही पहलों का पुरजोर समर्थन व्यक्त किया और कहा कि संवाद, संयम और सहयोग ही समाधान का रास्ता हैं। मोदी भारत के पहले पीएम हैं, जिसने नेसेट को संबोधित किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थिरता, विकास और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि आपसी विश्वास, सहयोग और साझा मूल्यों के आधार पर भारत-इजराइल संबंध आने वाले समय में और अधिक मजबूत होंगे।
