बैंकिंग समीक्षा बैठक: इंदौर में 825 करोड़ का मुद्रा लोन वितरित, स्ट्रीट वेंडर्स को मिली 63 करोड़ की मदद

इंदौर। सांसद शंकर लालवानी की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में बैंकर्स, प्रशासनिक अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में कारोबार के लिए आसान ऋण, सब्सिडी योजनाओं की वास्तविक स्थिति, अनक्लेम्ड अमाउंट तथा वित्तीय साक्षरता जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। इंडस्ट्री की ओर से प्रमोद डफरिया ने कहा कि केंद्र सरकार बिना सुरक्षा निधि (कोलेटरल) के लोन देने की योजनाएँ लाती है और बैंकों के सहयोग से इसे बेहतर ढंग से लागू किया जा सकता है। एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज महिला विंग की श्रीमती श्रेष्ठा गोयल ने बैंक सब्सिडी आधारित लोन एवं मुद्रा लोन आसानी से उपलब्ध करवाने की बात कही।

सांसद ने योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की

सांसद लालवानी ने योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि अब तक मुद्रा लोन के अंतर्गत 57,210 हितग्राहियों को लगभग 825 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया है। स्ट्रीट वेंडर योजना के अंतर्गत 2.70 लाख लोगों को 63 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए एनजीओ के साथ मिलकर कार्य किया जा रहा है। “संकल्प से समाधान” अभियान के तहत विभिन्न योजनाओं की मॉनिटरिंग की जा रही है। अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना पर भी चर्चा हुई।

सांसद शंकर लालवानी ने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए योजनाएं बनाई गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक बिना बाधा पहुँचे, यह सुनिश्चित करना होगा। साथ ही बैंकिंग तंत्र को जनहित और सुगमता की भावना से कार्य करना होगा।

बैठक में कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने निर्देश दिए कि सरकारी योजनाओं विशेषकर मुद्रा लोन और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि पात्र हितग्राहियों को लाभ मिल सके। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सिद्धार्थ जैन ने बैंक अधिकारियों से कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं में आवेदन निरस्त होने की शिकायतें मिली है और उन्होंने बैंक अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह (SHG) को दिए गए ऋणों की भी जानकारी ली गई।

वरिष्ठ कोषालय अधिकारी श्रीमती मोनिका कटारे ने बताया कि लगभग 10 वर्षों से अधिक समय से निष्क्रिय पड़े हुए बैंक खातो में अनक्लेम्ड अमाउंट की राशि करीब 250 करोड़ रुपये है। लगभग 6 लाख खाते अनक्लेम्ड स्थिति में हैं, यह खाते पिछले 10 सालों से सक्रिय नहीं है। इनमें व्यक्तिगत खातों के साथ विभिन्न सरकारी योजना के लिए खोले गए खाते भी हैं।

सांसद श्री लालवानी ने निर्देश दिए कि अनक्लेम्ड खातों की विस्तृत सूची प्रस्तुत की जाए। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि कोई खाता पिछले 10 सालों से निष्क्रिय है तो सम्बंधित बैंक की शाखा में जाकर उस खाते को सक्रिय किया जा सकता है और उस खाते में जमा राशि को प्राप्त की जा सकती है।

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