इंदौर:कभी आसमान से लगभग गायब हो चुके गिद्ध अब इंदौर वनमंडल के आकाश में फिर से चक्कर लगाते नजर आ रहे हैं. ताजा शीतकालीन गणना में गिद्धों की संख्या एक ही साल में दोगुनी हो गई है. यह बदलाव न सिर्फ वन विभाग के लिए राहत भरा है, बल्कि पर्यावरण संतुलन के लिहाज से भी अहम संकेत माना जा रहा है.इंदौर वनमंडल के वरिष्ठ वन संरक्षक प्रदीप मिश्रा, आईएफएस ने बताया कि चोरल क्षेत्र में सुरक्षित आवास, पर्याप्त भोजन और कम मानवीय हस्तक्षेप के कारण गिद्धों की संख्या तेजी से बढ़ी है. उन्होंने कहा कि यह वृद्धि सुनियोजित संरक्षण, फील्ड मॉनिटरिंग और स्थानीय स्तर पर जागरूकता के प्रयासों का परिणाम है.
20 से 22 फरवरी 2026 के बीच हुई गणना में इंदौर वनमंडल में कुल 151 गिद्ध दर्ज किए. पिछले साल यह आंकड़ा 73 था, यानी एक वर्ष में 78 गिद्धों की बढ़ोतरी हुई है. सभी गिद्ध ईजिप्शियन प्रजाति के पाए गए हैं. सबसे ज्यादा चहल-पहल चोरल क्षेत्र में दिखी, जहां अकेले 127 गिद्ध दर्ज किए. इसके मुकाबले महू में 4, मानपुर में 5 और इंदौर रेंज में 15 गिद्धों की मौजूदगी दर्ज हुई. पिछले वर्ष चोरल में सिर्फ 14 गिद्ध मिले थे, जिससे साफ है कि यह इलाका तेजी से सुरक्षित ठिकाने के रूप में उभर रहा है.
राज्य स्तर पर भी तस्वीर उत्साहजनक है. वर्ष 2016 में प्रदेश में 6,999 गिद्ध गिने गए थे. इसके बाद यह संख्या लगातार बढ़ती रही—2018 में 8,397, वर्ष 2021 में 9,446, फरवरी 2024 में 10,845 और फरवरी 2025 में 12,710 तक पहुंच गई. वन अधिकारियों का मानना है कि सुरक्षित आवास, भोजन की उपलब्धता और कम मानवीय हस्तक्षेप ने गिद्धों की वापसी में अहम भूमिका निभाई है. इस बार गणना डिजिटल तरीके से की गई. सुबह के समय उनके बैठने वाले स्थानों और घोंसलों पर मौजूद गिद्धों की गिनती मोबाइल एप के जरिए दर्ज की गई.
विशेषज्ञों का कहना है कि 1990 के दशक में डाइक्लोफेनाक दवा के कारण देशभर में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट आई थी. दवा पर प्रतिबंध और लगातार निगरानी के बाद अब हालात सुधरते दिखाई दे रहे हैं. गिद्धों को प्रकृति का सफाईकर्मी कहा जाता है. मृत पशुओं को तेजी से खत्म कर वे संक्रमण फैलने से रोकते हैं. फिलहाल इंदौर वनमंडल में उनकी बढ़ती संख्या पर्यावरण के लिए शुभ संकेत मानी जा रही है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह वापसी आने वाले वर्षों में कितनी स्थायी साबित होती है.
