चमोली/देहरादून | उत्तराखंड के चमोली जिले की धाविका भागीरथी बिष्ट ने दिल्ली मैराथन के 11वें संस्करण में रजत पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया है। रविवार को आयोजित इस फुल मैराथन में उन्होंने 42.195 किलोमीटर की दूरी मात्र 2 घंटे 43 मिनट में पूरी की। नेशनल और हैदराबाद मैराथन की विजेता रहीं भागीरथी ने पिछले एक साल में अपने समय में 8 मिनट का सुधार किया है। इस उपलब्धि के बाद उन्हें उम्मीद है कि वे आगामी एशियाई खेलों (Asian Games) के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने में सफल रहेंगी।
देवाल के वाण गांव की रहने वाली भागीरथी की सफलता के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी है। जब वह महज 3 साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया था। मां ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया। भागीरथी ने हिमाचल प्रदेश से अपने खेल करियर की शुरुआत की, जहाँ कोच सुनील शर्मा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। पिछले दो वर्षों से वे उत्तराखंड के पौड़ी स्थित रांसी स्टेडियम (हाई एल्टीट्यूड सेंटर) में कड़ा अभ्यास कर रही हैं, जहाँ वे प्रतिदिन सुबह-शाम 8-9 घंटे पसीना बहाती हैं।
भागीरथी के कोच सुनील शर्मा ने उनकी सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि भारत को यदि ओलंपिक में मेडल चाहिए, तो गांवों में छिपी प्रतिभाओं को तराशना होगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण युवाओं में नैसर्गिक दमखम होता है, लेकिन सही मार्गदर्शन के अभाव में वे पिछड़ जाते हैं। कोच ने सरकार और खेल संगठनों से अपील की है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर बुनियादी सुविधाएँ और गाइडेंस प्रदान करें। भागीरथी की इस सफलता से उनके पैतृक गांव और पूरे उत्तराखंड में जश्न का माहौल है।

