​सीहोर में गिद्धों के अस्तित्व पर संकट: एक साल में 58 गिद्ध कम हुए, वन विभाग की बढ़ी चिंता

सीहोर। जिले में गिद्धों की घटती संख्या ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है. पिछले कई वर्षों से लगातार बढ़ रही गिद्धों की संख्या में इस बार अप्रत्याशित गिरावट दर्ज की गई है. एक वर्ष के अंतराल में जिले में 58 गिद्ध कम हो गए हैं.

वर्ष 2025 की गणना में जिले के 6 प्रमुख ठिकानों पर 164 गिद्ध दर्ज किए गए थे, जबकि रविवार को पूरी हुई ताज़ा गणना में इनकी संख्या घटकर मात्र 106 रह गई. यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2022 में जिले में 99 गिद्ध थे. फरवरी 2024 में यह संख्या बढ़कर 135 हुई और वर्ष 2025 में 164 तक पहुंच गई थी. ऐसे में इस बार आई गिरावट ने संरक्षण की आवश्यकता को और गंभीर बना दिया है.

वन विभाग के एसडीओ राजेश शर्मा के अनुसार गिद्धों की गणना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है. गिद्ध प्राय: उन स्थानों पर पाए जाते हैं जहां ग्रामीण मृत पशुओं को छोड़ते हैं. ऐसे स्थानों पर दुर्गंध के कारण पांच मिनट तक खड़े रहना भी कठिन होता है. बावजूद इसके टीमों ने धैर्य और सतर्कता के साथ गणना की. एसडीओ शर्मा ने बताया कि गिद्ध जहां बैठते हैं, वहां के फोटो लिए जाते हैं. उड़ते और बैठे गिद्धों की अलग-अलग गिनती की जाती है. उदाहरण के तौर पर यदि पहले दिन 100 गिद्ध दिखे और दूसरे दिन 97, तो 97 को मानक नहीं माना जाता. तीसरे दिन यदि 106 गिद्ध दिखाई दें तो अधिकतम संख्या को स्टैंडर्ड माना जाता है.

फोटोग्राफ के माध्यम से यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि एक ही गिद्ध को दो स्थानों पर दो बार न गिना जाए. गौरतलब है कि गिद्ध पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. ये खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर होते हैं और मृत पशुओं के अवशेष खाकर वातावरण को स्वच्छ रखने में योगदान देते हैं.लगातार गिरती संख्या यह संकेत देती है कि अब गिद्धों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयासों की आवश्यकता है.

सूर्योदय से पूर्व प्रारंभ हुई गिद्धों की सर्चिंग

रविवार को सुबह 5 से 8 बजे तक तीन घंटे विशेष गणना अभियान चलाया गया. वन विभाग की टीमें तड़के 4 बजे ही रवाना हो गई थीं. जिले भर के अलग-अलग क्षेत्रों में गिद्धों की सर्चिंग की गई. अधिकांश गिद्ध देशी प्रजाति के पाए गए, वहीं सर्चिंग के दौरान कुछ इजिप्शियन वल्चर (सफेद गिद्ध) भी दर्ज किए गए.

हसनाबाद के जंगल में सर्वाधिक गिद्ध

जिले में गिद्धों के 6 प्रमुख ठिकाने चिन्हित हैं. हसनाबाद कोनाझिर क्षेत्र के जंगल में सर्वाधिक 51 गिद्ध मिले. वीरपुर के लोहापठार क्षेत्र में भी गिद्धों की मौजूदगी दर्ज की गई. इसी प्रकार बुधनी क्षेत्र के खटपुरा और सईदगंज में प्राकृतिक आवास चट्टानों और पत्थरों के बीच पाए गए. वहीं सईदगंज में 23 गिद्ध और खटपुरा के जंगल में तीन अलग-अलग स्थानों पर 25 गिद्ध दर्ज किए गए.

आवास संकट भी बड़ी वजह

गिद्ध बड़े और घने पेड़ों या खड़ी चट्टानों पर घोंसले बनाते हैं. लगातार घटते जंगल और प्राकृतिक आवासों के नष्ट होने से इनके प्रजनन की गति प्रभावित हो रही है. यही कारण है कि इनकी संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है. गिद्धों की संख्या में गिरावट का बड़ा कारण रासायनिक दवाएं रही हैं, जो पशुओं के शवों के माध्यम से उनके शरीर में पहुंच जाती हैं. इनके घातक प्रभाव सामने आने के बाद वर्ष 08 में संबंधित दवा पर प्रतिबंध लगाया गया था.

इजिपिश्यन वल्चर की यह पहचान

सफेद गिद्ध को अंग्रेजी में इजिप्शियन वल्चर कहा जाता है. जिसकी लंबाई 55 से 65 सेमी और वजन लगभग 1.5 से 2 किलोग्राम होता है. पंखों का फैलाव 5 से 5.5 फीट तक होता है. इनकी पहचान नुकीला पीला चेहरा, मटमैले पंख और उड़ान के दौरान काले पंख स्पष्ट दिखाई देते हैं. वन विभाग के अनुसार जिले में देशी व काले राज प्रजाति के गिद्ध भी पाए गए हैं.

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