मंदसौर: मंदसौर जिले के ग्राम कनघट्टी में देश का पहला “भारत सरसों संगम 2026” आयोजित किया गया, जिसमें 1500 से अधिक किसानों ने भाग लेकर सरसों उत्पादन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। इस ऐतिहासिक आयोजन में कृषि क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों एवं संस्थाओं ने स्टॉल लगाकर उन्नत बीज, पोषण प्रबंधन, जैविक व पुनर्योजी कृषि पद्धतियों तथा बाजार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां किसानों को दीं।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग ने किसानों को पुनर्योजी कृषि अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि तिलहनी फसलों का विस्तार किसानों की आय बढ़ाने के साथ देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मददगार होगा।
इस अवसर पर The Solvent Extractors’ Association of India के चेयरमैन डॉ. बी. वी. मेहता ने सरसों उत्पादन बढ़ाने पर जोर देते हुए वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने की अपील की, वहीं सॉलिडरिडाड के महाप्रबंधक सुरेश मोटवानी ने पुनर्योजी कृषि मॉडल को किसानों के लिए लाभकारी बताया।कार्यक्रम में Adani Wilmar Limited, Louis Dreyfus Company और VVF Limited के प्रतिनिधियों ने गुणवत्ता आधारित खरीद, मूल्य संवर्धन और बाजार व्यवस्था की जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. चुंडावत ने फसल चक्र, जैविक खाद, संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा परीक्षण आधारित खेती के महत्व पर प्रकाश डाला।
जिला उप संचालक कृषि रवींद्र मोदी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सूक्ष्म सिंचाई एवं तिलहन प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों से लाभ लेने का आह्वान किया।
संगम में लगे स्टॉल किसानों के आकर्षण का केंद्र रहे, जहां उन्होंने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर समस्याओं का समाधान प्राप्त किया। इस आयोजन में मंदसौर के साथ रतलाम, नीमच, हरियाणा और राजस्थान से आए प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए।कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष कन्हैयालाल, जनप्रतिनिधि, सरपंच, किसान एवं पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन सरसों उत्पादन को नई दिशा देंगे और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे।
