
भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई मौतों के मामले में गुरुवार को विधानसभा में आक्रोशित व्यवहार के कारण आलोचनाओं का सामना कर रहे राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आज शांत भाव से सदन में स्वीकर किया कि इंदौर की घटना लापरवाही का परिणाम रही और अब सरकार ने समूचे प्रदेश के लिए कार्ययोजना बनाई है।
विजयवर्गीय ने आज सदन में बेहद संतुलित तरीके से भागीरथपुरा की घटना पर अपना पक्ष रखा। वे इससे जुड़े विपक्ष के स्थगन प्रस्तावों की ग्राह्यता पर सरकार का पक्ष रख रहे थे। उन्होंने भावुक अंदाज में संबोधित करते हुए इंदौर को अपनी ‘मां’ बताया और कहा कि भागीरथपुरा की घटना देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर पर किसी कलंक के समान है और इंदौर जल्द ही अपनी जीवटता से इसे धो देगा।
उन्होंने स्वीकार किया कि नागरिकों ने पानी की शिकायत की थी। महापौर ने टेण्डर बुलाए, टेण्डर बुलाने के बाद कुछ विलम्ब हुआ। टेण्डर आने के बाद भी काम प्रारंभ नहीं हुआ, उसे लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने एक कमेटी बनाई थी और कमेटी में कुछ अधिकारी उसमें दोषी पाये गये थे, उनके खिलाफ कार्रवाई भी हुई है।
उन्होंने इस पूरी घटना के दौरान किए गए निजी, शासकीय और सामाजिक राहत कार्यों का भी उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने राहत के लिए आगे आए कांग्रेस के स्थानीय लोगों की भी प्रशंसा की। हालांकि उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कांग्रेस के कुछ लोगों पर चिकित्सकों के काम में बाधा डालने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजनीति कहां करनी है, ये तय किया जाना चाहिए। ऐसी जगहों को सहानुभूति और मरहम की आवश्यकता होती है न कि राजनीति की।
मंत्री विजयर्गीय ने भागीरथपुरा की घटना को लेकर इंदौर के स्वच्छता में प्रथम स्थान पर उंंगली उठाने वालों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ये उन महिला सफाईकर्मियों का अपमान है तो रात में दो बजे उठ कर इंदौर की सड़कों को साफ करने में जुटती हैं।
उन्होंने कहा कि ये घटना लापरवाही के कारण हुई है। अब पूरे मध्यप्रदेश में जो पानी दूषित है, उसके लिए कार्ययोजना बनाई है। भागीरथपुरा में लोगों की मौत डायरिया के कारण हुई। 22 लोगों की मृत्यु में 44 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया है। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा है कि और मुआवजा बढ़ाएंगे। अमृत वन और अमृत टू के माध्यम से लगभग 2 हजार 261 करोड़ के काम हो रहे हैं। भागीरथपुरा में अभी 13 किलोमीटर की लाईन बिछा दी है, 16 किलोमीटर की और बिछा रहे हैं। अभी वहां 55 टेंकर लगा रखे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की चिंता कर रही है, प्रतिदिन पानी चैक हो रहा है, जो लोग बीमार हुए थे, उनका भी परीक्षण अभी भी लगातार जारी है।
वहीं ग्राहृयता से जुड़ी चर्चा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि पूरा सत्ता पक्ष चर्चा से भाग रहा है। सरकार और अधिकारी फाइलों की चाल कम कर देते हैं। सरकार आंकड़े छिपा रही है। इस मामले में सरकार की लापरवाही के कारण ही न्यायालय काे हस्तक्षेप करना पड़ा।
सिंघार ने आरोप लगाया कि इस मामले में दोषी पाए गए अधिकारियों की जाति देख कर उन पर कार्रवाई की गई। इस पर श्री विजयवर्गीय ने आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी को उसकी जाति देख कर नहीं हटाया गया।
नेेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि उन्होंने समूचे इंदौर में वॉटर ऑडिट कराया है और शहर की सभी विधानसभाओं में पानी की स्थिति बहुत खराब है। उन्होंने जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों पर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के साथ मंत्री विजयवर्गीय के इस्तीफे की भी मांग की।
दोनों पक्षों की ओर से चर्चा के बाद अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विपक्ष की ओर से दिए गए स्थगन प्रस्तावों को अग्राह्य कर दिया।
इसके पहले कल भी इस मामले में नेता प्रतिपक्ष सिंघार और मंत्री विजयवर्गीय के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी। इस दौरान विजयवर्गीय ने आवेश में आकर सिंघार पर अमर्यादित टिप्पणी कर दी, जिसके बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस मामले में क्षमायाचना की थी।
