नटेरन: तहसील मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. क्षेत्र के कई आंगनबाड़ी केंद्रों से मिलने वाली दवाओं और पोषण सामग्री के वितरण में भारी अनियमितता सामने आ रही है. आरोप है कि गरीब बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए शासन द्वारा भेजी जाने वाली दवाएं लाभार्थियों तक पहुंच ही नहीं पा रहीं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई केंद्रों में दवाओं का सही वितरण नहीं हो रहा, बल्कि उन्हें नष्ट कर दिया जाता है या लापरवाही के कारण बेकार हो जाती हैं. गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों के लिए दी जाने वाली आवश्यक दवाएं और पोषण आहार नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है.
स्थिति यह भी बताई जा रही है कि कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने पदस्थ ग्राम में निवास नहीं कर रहीं और अन्य स्थानों से अप-डाउन कर रही हैं. इसके चलते वे समय पर केंद्र नहीं पहुंच पातीं. शासन के
नियम अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक खुले रहने चाहिए, लेकिन कई केंद्रों में ताले लटके मिलते हैं. कुछ स्थानों पर तो एक-एक सप्ताह तक केंद्र नहीं खुलने की शिकायत है. कई केंद्र सहायिकाओं के भरोसे चल रहे हैं, वहीं जहां सहायिका की नियुक्ति नहीं है वहां व्यवस्थाएं और अधिक प्रभावित हैं. ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों से जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है.
