मुंबई | भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की बैंकिंग प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया है। अप्रैल 2026 से 1962 से चली आ रही ‘समान दर प्रणाली’ को समाप्त कर दिया जाएगा। अब तक सभी बैंकों को अपनी जमा राशि पर प्रति 100 रुपये पर 12 पैसे का एकसमान प्रीमियम देना पड़ता था, चाहे बैंक की वित्तीय स्थिति कैसी भी हो। नई व्यवस्था के तहत अब बैंकों को उनकी आर्थिक मजबूती और जोखिम प्रबंधन के आधार पर प्रीमियम चुकाना होगा। यह कदम बैंकों को अपनी पूंजी पर्याप्तता और NPA (गैर-निष्पादित संपत्ति) में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे पूरे बैंकिंग सेक्टर की सेहत सुधरेगी।
आरबीआई की नई योजना के तहत बैंकों को उनकी वित्तीय सेहत के अनुसार A, B, C और D जैसी चार विशिष्ट श्रेणियों में बांटा जाएगा। सबसे सुरक्षित श्रेणी ‘A’ के बैंकों को अब 12 पैसे की जगह केवल 8 पैसे प्रति 100 रुपये प्रीमियम देना होगा, जिससे उनकी परिचालन लागत में बड़ी कमी आएगी। श्रेणी B के लिए 10 पैसे और C के लिए 11 पैसे का प्रीमियम तय किया गया है, जबकि सबसे अधिक जोखिम वाले श्रेणी D के बैंकों को पहले की तरह 12 पैसे ही देने होंगे। व्यावसायिक बैंकों के लिए टीयर-1 मॉडल और ग्रामीण व सहकारी बैंकों के लिए टीयर-2 मॉडल के जरिए जोखिम का सटीक आकलन किया जाएगा।
इस बड़े बदलाव से आम जमाकर्ताओं की सुरक्षा पर कोई आंच नहीं आएगी। बैंक डूबने की स्थिति में मिलने वाली 5 लाख रुपये तक की बीमा कवर सीमा पहले की तरह ही सुरक्षित रहेगी। हालांकि, मजबूत बैंकों की लागत घटने से भविष्य में ग्राहकों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर बेहतर ब्याज दरें मिलने की उम्मीद है। साथ ही, बेहतर रिकॉर्ड वाले पुराने बैंकों को ‘विंटेज इंसेंटिव’ के तहत सालाना अतिरिक्त छूट भी मिलेगी, जो अधिकतम 25 प्रतिशत तक हो सकती है। फिलहाल पेमेंट्स बैंक और लोकल एरिया बैंक इस नई व्यवस्था से बाहर रहेंगे और वे पुरानी दरों पर ही प्रीमियम का भुगतान जारी रखेंगे।

