नयी दिल्ली, 08 फरवरी (वार्ता) राजधानी में रविवार को आयोजित हुयी 59वीं वार्षिक ‘स्टेट्समैन विंटेज कार रैली’ का शानदार समापन हो गया। इस रैली में पुरानी कारों में शुमार 1906 की शानदार ‘रेनो’ कार ने चार चांद लगा दिये।
यह रैली बाराखंभा रोड स्थित ‘स्टेट्समैन हाउस’ से शुरू होकर मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम तक निकली, तो लगा मानो वक्त का पहिया पीछे घूम गया हो। शहर के बीचों-बीच से जब ये विंटेज गाड़ियां गुजरीं, तो इंजनों की विशिष्ट गूँज और सड़कों पर उनकी शानदार चाल किसी लयबद्ध संगीत की छटा बिखेर रही थी।
इस आयोजन में 1906 की शानदार ‘रेनो’ से लेकर 1938 की ‘मर्सिडीज’ और ‘एडलर’ तक की दुर्लभ मशीनों का जमघट लगा था। रैली में भाग लेने वाली प्रतिष्ठित कारों की श्रृंखला में 1936 की रॉल्स रॉयस, 1926 की स्टडबेकर एर्स्किन, 1935 की राइटक्रॉफ्ट, 1937 की वोल्सेले और 1912 की स्टैंडर्ड कोवेंट्री जैसी गाड़ियां मुख्य आकर्षण रहीं। विशेष रूप से रेल संग्रहालय के स्वामित्व वाला 1914 का ‘जॉन मॉरिस फायर इंजन’ आकर्षण का केंद्र बना रहा। सौ से अधिक विंटेज दिग्गजों की चमक देख लोग पुरानी यादों में खो गए।
इस रैली ने दिल्ली की आधुनिक सड़कों को एक जीवंत संग्रहालय में तब्दील कर दिया। भारी भीड़ इन खूबसूरत गाड़ियों की चमकती ‘क्रोम फिनिश’ और उनके बेहतरीन रख-रखाव को देखने के लिए उमड़ पड़ी। उत्साही लोगों के लिए इन दुर्लभ ‘चलती-फिरती कलाकृतियों’ को निहारना एक शानदार अवसर था। इन क्लासिक कारों की हर सवारी अपने आप में किसी सुनहरी कहानी और रोमांच की तरह महसूस हो रही थी। यह आयोजन अपने पीछे बेमिसाल कारीगरी और बीते जमाने की भव्यता की यादें छोड़ गया।
दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने सुबह हरी झंडी दिखाकर इस प्रतिष्ठित रैली का शुभारंभ किया था और राजधानी के लोगों को विंटेज, क्लासिक और पोस्ट-वार श्रेणियों में वर्गीकृत इन वाहनों के जरिए एक मंत्रमुग्ध कर देने वाले युग की झलक मिली। बाराखंभा रोड पर मौजूद कार मालिकों को इस आयोजन का साल भर बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि यह उन्हें अपनी विरासत को आधुनिक सड़कों पर चलाने का अनूठा मौका देता है।
गौरतलब है कि ‘द स्टेट्समैन विंटेज एंड क्लासिक कार रैली’ एक वार्षिक समारोह है, जिसका आयोजन दिल्ली और कोलकाता में होता है। यह भारत और उपमहाद्वीप की सबसे पुरानी लगातार चलने वाली स्पर्धाओं में से एक है, जिसकी शुरुआत 1964 में दिल्ली से हुई थी। इस स्पर्धा में कारों की मौलिकता और उनके सड़क पर प्रदर्शन का आकलन किया जाता है। दिल्ली वासियों के लिए यह दिन न केवल इंजीनियरिंग के अजूबों का जश्न था, बल्कि अपने सुनहरे अतीत को जी भरकर जीने का एक सुखद अनुभव भी था।
