
सारनी। पाथाखेड़ा क्षेत्र में स्थित कोयला खदान मजदूरों ने भूमिगत खदानों में उतरने से पहले मजदूरों का आर-पार का ऐलान ,सारनी क्षेत्र के पाथाखेड़ा क्षेत्र की भूमिगत कोयला खदानों में कार्यरत मजदूरों ने अपने अधिकारों को लेकर निर्णायक संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। मजदूरों द्वारा प्रशासन और खदान प्रबंधन को दिए जाएंगे अल्टीमेटम ,स्थानीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। श्रमिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मूलभूत मांगें पूरी नहीं होंगी, वे भूमिगत खदानों में काम पर नहीं उतरेंगे।
सोमवार को मजदूरों का प्रतिनिधिमंडल स्थानीय प्रशासन से चर्चा करेगा। इस बैठक को निर्णायक माना जा रहा है। मजदूर नेताओं का कहना है कि यदि ठोस समाधान नहीं निकला तो खदानों का कामकाज ठप हो सकता है और आंदोलन तेज किया जाएगा।
वरिष्ठ नेता प्रदीप नागले ने कहा,अब मजदूरों पर होने वाला अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिना जॉइनिंग लेटर और पहचान के जोखिम भरे भूमिगत कार्य में मजदूर नहीं उतरेंगे। पहले अधिकार सुरक्षित होंगे, तभी काम होगा।
वहीं संतोष देशमुख ने बताया कि मजदूरों ने प्रबंधन व ठेकेदारों के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं लिखित जॉइनिंग लेटर, प्रत्येक श्रमिक को PF-CMPF नंबर, नियमित एवं निश्चित वेतन, श्रम कानूनों के अनुसार सुरक्षा सुविधाएं तथा ठेकेदारों द्वारा कथित कटौती और शोषण पर तत्काल रोक।
मजदूरों का आरोप है कि कई श्रमिक बिना औपचारिक दस्तावेजों के जोखिमपूर्ण कार्य करने को मजबूर हैं और दुर्घटना की स्थिति में उन्हें वैधानिक लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने यह भी दावा किया कि खाते में 35-40 हजार रुपये डालकर 12-13 हजार रुपये ही मजदूरों को दिए जाते हैं और शेष राशि वापस ले ली जाती है। मजदूरों ने इस प्रथा को बंद करने तथा अब तक काटी गई राशि लौटाने की मांग की है।अब सबकी निगाहें प्रशासन-प्रबंधन और मजदूरों के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हैं। यही तय करेगा कि खदानों में मशीनों की आवाज गूंजेगी या आंदोलन की हुंकार।
