नयी दिल्ली, 07 फरवरी (वार्ता) विभिन्न उद्योग संगठनों ने अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को निर्यातकों के हित में बताते हुए कहा कि इससे उनके लिए अमेरिकी बाजार के द्वार और खुल जायेंगे।
उद्योग मंडल पीएचडीसीसीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं महासचिव रंजीत मेहता ने कहा कि यह अंतरिम व्यापार समझौता अमेरिका–भारत व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। यह दोनों देशों के निर्यातकों के लिए बाजार तक पहुंच का विस्तार करेगा और एक स्थिर एवं व्यापक व्यापार ढांचा प्रदान करेगा।
भारत और अमेरिका ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते पर साझा बयान जारी किये जिसमें यह बताया गया है कि किन वस्तुओं को परस्पर शुल्कों की दरों में कितना बदलाव किया गया है।
ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) के अध्यक्ष राजेश रोडे ने कहा कि रत्न और हीरों पर अमेरिका में आयात शुल्क शून्य हो जाने से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अभूतपूर्व पहुंच प्राप्त हुई है। इससे भारतीय निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी, मुनाफे का अनुपात बढ़ेगा और यह सुनिश्चित होगा कि भारतीय कारीगरों का काम अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों तक उचित कीमतों पर पहुंचे।
व्यापार समझौते के तहत अमेरिका भारतीय रत्नों और हीरों पर अपने यहां आयात शुल्क शून्य करेगा। हालांकि तैयार गहनों पर 18 प्रतिशत शुल्क लगेगा।
जीजेसी के उपाध्यक्ष अविनाश गुप्ता ने रत्नों और हीरों को आयात शुल्क-मुक्त किये जाने को बदलावकारी कदम बताया, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए। उन्होंने कहा कि छोटे तथा मध्यम उद्यमों और पारिवारिक कारोबारियों को अब अमेरिकी बाजार में समान शर्तों पर प्रवेश मिलेगा, जिससे निर्यात बढ़ेगा, राजस्व मजबूत होगा और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा।
