ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की मंज़ूरी दी

वाशिंगटन, 07 फरवरी (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान संबंधी एक खास कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। यह आदेश अमेरिका को उन देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की अनुमति देता है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ईरान से सामान या सेवाएं खरीदते हैं।

व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि यह आदेश विशिष्ट टैरिफ स्तर तो निर्धारित नहीं करता है, लेकिन अधिकारियों को बदलती परिस्थितियों के आधार पर उन्हें तय करने और समायोजित करने के लिए अधिकृत करता है।

इस आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर हालात बदलते हैं, जवाबी कार्रवाई होती है, या यदि ईरान अथवा कोई प्रभावित देश राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति एवं आर्थिक मामलों पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ तालमेल बिठाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाता है, तो राष्ट्रपति इस आदेश में संशोधन कर सकते हैं। यह आदेश विदेश मंत्री, वाणिज्य मंत्री और व्यापार प्रतिनिधि को टैरिफ प्रणाली एवं संबंधित उपायों को लागू करने के लिए नियम और दिशा-निर्देश जारी करने सहित सभी आवश्यक कार्रवाई करने के लिए अधिकृत करता है।

इसका उद्देश्य ईरान के ऐसे कदमों का सामना करना है, जिसमें उसकी परमाणु क्षमता हासिल करने की कोशिश, आतंकवाद का समर्थन, बैलिस्टिक मिसाइल विकास और क्षेत्रीय अस्थिरता शामिल है। व्हाइट हाउस के अनुसार, ये सभी कारक अमेरिकी सुरक्षा, उनके सहयोगियों और अमेरिकी हितों के लिए खतरा हैं।

बयान में आरोप लगाते हुए कहा गया, “ईरान पूरे मध्य पूर्व में प्रॉक्सी समूहों और मिलिशिया को समर्थन प्रदान करता है। इनमें वे संगठन भी शामिल हैं जो अमेरिकियों को हताहत करने और अमेरिकी सेना, क्षेत्रीय भागीदारों एवं सहयोगियों को सक्रिय रूप से निशाना बनाने में संलिप्त हैं।”

व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि ईरानी शासन द्वारा संसाधनों का कुप्रबंधन स्पष्ट है। वह अपने बुनियादी ढांचे और नागरिकों की भलाई के बजाय परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को प्राथमिकता देता है, जबकि वहां की जनता आर्थिक कठिनाई और अभाव का सामना कर रही है। ईरान अपने ही लोगों को बेरहमी से दबाता है, हजारों प्रदर्शनकारियों की हत्या करता है और बुनियादी मानवाधिकारों से इनकार करता है।

ईरान की ये कार्रवाइयाँ अमेरिका के लिए एक निरंतर और असाधारण खतरा पेश करती हैं, जिसके लिए अमेरिकी नागरिकों, सहयोगियों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा हेतु तीव्र प्रतिक्रिया आवश्यक है।

 

 

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