नयी दिल्ली 06 फरवरी (वार्ता) पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख एयर मार्शल जीतेन्द्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबकों को महत्वपूर्ण बताते हुए भविष्य के युद्धों और अभियानों में इनकी भूमिका पर बल दिया है। कमान के सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर एयर मार्शल जे एस मान ने भी सेनाओं के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता बढ़ाने, डोमेन-निरपेक्ष निर्णय प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने, ‘सेंसर-टू-शूटर’ संपर्कों को सुदृढ़ करने तथा अधिक दक्षता के लिए संचालन प्रक्रियाओं में सुधार को जरूरी बताया।
रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को एक वक्तव्य जारी कर कहा कि पश्चिमी वायु कमान मुख्यालय ने दो दिन के ‘ऑल डोमेन जॉइंट ऑपरेशंस’ अभ्यास के दौरान उच्चस्तरीय संयुक्त संचालन सम्मेलन का आयोजन किया। इसका उद्देश्य संचालन स्तर पर अंतःसेना और अंतर-सेना समन्वय को सुदृढ़ करना था जिससे कि बढ़ते जटिल बहु-डोमेन माहौल में भारतीय रक्षा बलों की संयुक्त संचालन क्षमताओं को और अधिक मजबूत किया जा सके।
सम्मेलन में मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ , सेना, नौसेना, रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी तथा रक्षा खुफिया एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ वायु सेना के वरिष्ठ नेतृत्व ने भाग लिया।
एयर मार्शल मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर से प्राप्त महत्वपूर्ण सबकों तथा भविष्य के युद्ध संचालन पर उनके व्यापक प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने निर्णायक रणनीतिक प्रभाव उत्पन्न करने में वायु शक्ति की केंद्रीय भूमिका, सतही युद्धाभ्यास को आक्रामक वायु अभियानों के साथ समन्वित करने की आवश्यकता तथा स्टैंड-ऑफ हथियारों के प्रयोग से प्राप्त रणनीतिक लाभ को विशेष रूप से उजागर किया।
उन्होंने 1971 की लड़ाई की पारंपरिक क्षरण-आधारित युद्ध अवधारणाओं तथा पारंपरिक ‘इफेक्ट्स-बेस्ड ऑपरेशंस’ ढांचे से आगे बढ़ते हुए अधिक फुर्तीले, अनुकूलनीय एवं पूर्णतः एकीकृत संयुक्त युद्धक प्रतिमान को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने मौजूदा क्षमता कमियों की पहचान एवं उन्हें दूर करने सहित सभी डोमेनों में तालमेल को सुदृढ़ करने तथा ऑल-डोमेन युद्धक्षेत्र में समन्वित, प्रभाव-आधारित प्रतिक्रियाओं के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
एयर मार्शल मान ने समकालीन और भविष्य के संघर्षों में संयुक्तता और एकीकृत युद्ध संचालन के अत्यधिक महत्व पर बल दिया। उन्होंने वायु, थल, समुद्र, अंतरिक्ष एवं साइबर डोमेन में निर्बाध एकीकरण सुनिश्चित करने वाले ‘ऑल-डोमेन’ संचालन दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित किया जिससे कि चुनौतीपूर्ण एवं अवरुद्ध वातावरण में निर्णायक परिणाम हासिल किए जा सकें। उन्होंने सेनाओं के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता बढ़ाने, डोमेन-निरपेक्ष निर्णय प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने, सेंसर-टू-शूटर संपर्कों को सुदृढ़ करने तथा अधिक दक्षता के लिए संचालन प्रक्रियाओं में सुधार पर जोर दिया।
एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने एकीकृत योजना, खुफिया जानकारी साझा करने एवं क्षमता प्राथमिकता निर्धारण के लिए संयुक्त तंत्रों को संस्थागत रूप देने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने अंतर-सेना समन्वित प्रतिक्रियाओं तथा क्षमता अंतरालों की पहचान पर बल दिया, जिससे भविष्य की आकस्मिक परिस्थितियों के लिए समग्र संचालन तत्परता को सुदृढ़ किया जा सके। उन्होंने सभी डोमेनों में एकीकरण को आगे बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया ताकि सेवाओं के बीच सामूहिक प्रभाव उत्पन्न कर एकीकृत संचालन परिणाम हासिल किए जा सकें।
एयर मार्शल दीक्षित ने मजबूत एकीकृत संचालन क्षमता एवं सतत रणनीतिक तत्परता के लिए त्वरित सिद्धांतगत विकास और तीनों सेनाओं में समन्वय की भी वकालत की।
