संघ प्रमुख मोहन भागवत का अवैध घुसपैठ पर कड़ा प्रहार, कहा- बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को चुन-चुनकर बाहर निकालना सरकार की जिम्मेदारी, राष्ट्रीय हितों से न हो कोई समझौता

हैदराबाद | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों के मुद्दे पर सरकार की जिम्मेदारी तय की है। हैदराबाद में ‘संघ यात्रा के 100 साल’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अवैध घुसपैठियों की पहचान करना और उन्हें देश से बाहर निकालना पूरी तरह से शासन का काम है। भागवत ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में हर देश अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखता है, इसलिए भारत को भी बिना किसी बाहरी दबाव के अपने सुरक्षा हितों के अनुरूप कड़े निर्णय लेने चाहिए। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे ऐसे मामलों की जानकारी अधिकारियों को देकर सहयोग करें।

दुनिया भर में जारी आर्थिक और सामाजिक अस्थिरता पर चर्चा करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि वैश्विक “उथल-पुथल” का असर भारत पर अन्य देशों की तुलना में कम पड़ेगा। इसकी मुख्य वजह उन्होंने भारत की मजबूत पारिवारिक व्यवस्था, सोने के रूप में बचत की भारतीय परंपरा और परिवार-केंद्रित आर्थिक गतिविधियों को बताया। भागवत के अनुसार, ये सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्य भारत को वैश्विक संकटों के समय भी स्थिरता प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि देश को वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए आर्थिक और सामाजिक रूप से और अधिक संगठित होने की आवश्यकता है, जिससे भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभर सके।

संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस सत्र में मोहन भागवत ने आरएसएस के विजन को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि संघ को केवल बाहर से देखकर नहीं समझा जा सकता, इसके लिए उसका हिस्सा बनना जरूरी है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि राष्ट्र के विकास में केवल सरकारें, दल या नेता ही जिम्मेदार नहीं होते, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भूमिका सबसे अहम होती है। अपने दौरे के दौरान उन्होंने फिल्म जगत की हस्तियों और वरिष्ठ नौकरशाहों से भी मुलाकात की और भविष्य के भारत के निर्माण में जन-भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

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