नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच टेलीफोन पर हुई सफल वार्ता के बाद भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर आधिकारिक मुहर लग गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस ऐतिहासिक डील का ऐलान करते हुए भारत पर लगे ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को तत्काल प्रभाव से 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इसके बदले में भारत ने अमेरिका से ऊर्जा, तकनीक और कृषि क्षेत्र में 500 अरब डॉलर से अधिक की खरीदारी करने और रूसी तेल पर निर्भरता कम करने की प्रतिबद्धता जताई है। पीएम मोदी ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए इसे ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों के लिए एक नया युग बताया है।
पिछले छह महीनों के भीतर भारत ने वैश्विक आर्थिक मंच पर अपनी पकड़ बेहद मजबूत की है। अमेरिका के साथ हुई इस ताजा डील को मिलाकर भारत अब तक पांच महत्वपूर्ण समझौते कर चुका है। इनमें जुलाई 2025 में यूनाइटेड किंगडम (UK) के साथ व्यापक आर्थिक समझौता, दिसंबर 2025 में ओमान और न्यूजीलैंड के साथ द्विपक्षीय व्यापार संधियां, और हाल ही में 27 जनवरी 2026 को यूरोपीय संघ (EU) के साथ किया गया ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ शामिल है। इन समझौतों के जरिए कपड़ा, इंजीनियरिंग, जेम्स-ज्वैलरी और आईटी सेक्टर के भारतीय निर्यात पर टैक्स लगभग खत्म या न्यूनतम हो गया है।
अमेरिका के साथ हुई इस ट्रेड डील का सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर भी स्पष्ट दिखाई दिया। सेंसेक्स और निफ्टी में रिकॉर्ड तोड़ तेजी के साथ निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में 20 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन व्यापार समझौतों से भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर नई गति मिलेगी। ऑटोमोबाइल और फार्मा जैसे प्रमुख क्षेत्रों को टैरिफ में कटौती से भारी लाभ होने की उम्मीद है, जिससे देश में विदेशी निवेश (FDI) और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

