नरेंद्र सिंह के तंज से महल खेमा हैरत में, फिर खुला फ्रंट

ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे

देखो, सब्र और इंतजार करो, के फलसफे पर चलने वाले नरेन्द्र सिंह तोमर संयत, मितभाषी और सुलझी हुई राजनीति के लिए जाने जाते हैं। उन्हें बहुत ही कम दफा आपा खोते हुए देखा गया है। भाषणों में विरोधियों पर आक्रामक होने से बचते हैं लेकिन इस बार मुरैना में उन्होंने बेलाग अंदाज में जो कुछ कहा और घर के ही विरोधियों पर जो शब्दबाण छोड़े, उससे उनके विरोधी ही नहीं चौंके बल्कि उन्हें करीब से जानने वाले समर्थक भी ये आक्रामक तेवर देख अचरज में पड़ गए। ग्वालियर चंबल अंचल में विकास कार्यों का श्रेय लेने को लेकर उनके व सिंधिया के दरम्यान कोल्डवार चलता रहता है लेकिन दोनों नेता अब तक एक दूसरे के खिलाफ सपाट टिप्पणियां करने से बचते रहे हैं।

नरेन्द्र सिंह ने इस बार जो कुछ कहा, उससे महल का खेमा नाराज है। दरअसल, नरेन्द्र सिंह ने अपने विधानसभा क्षेत्र दिमनी में सरकारी कार्यक्रम में सिंधिया का नाम लिए बिना कह दिया कि जो लोग हर योजना का श्रेय लूटकर मै.. मै करते फिरते हैं उन्हे शायद नहीं पता कि अंचल में जो भी विकास हो रहा है वो भाजपा सरकार बनने की वजह से हो रहा है, वरना जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी तब मै.. मै करने वालों ने क्या कर लिया? राजनीति के जानकारों से लेकर आम कार्यकर्ताओं तक का यही मानना है कि नरेन्द्र सिंह का इशारा सिंधिया की ओर था।

नरेंद्र सिंह द्वारा सार्वजनिक रूप से कसे गए तंज पर सिंधिया खेमे की ओर से अब तलक कोई पलटवार नहीं हुआ है। दरअसल, ग्वालियर से नरेंद्र सिंह के कट्टर समर्थक माने जाने वाले भारत सिंह कुशवाह लोकसभा में नुमाइंदगी कर रहे हैं। ग्वालियर के लिए मंजूर होने वाले विकास कार्यों का सेहरा वे अपने सिर बांधते हैं जबकि सिंधिया के समर्थक इसे अपने नेता के प्रयासों का नतीजा बताते नहीं थकते।

चाहे महल में आयोजित भोज का मामला हो, या फिर यूनिवर्सिटी में जीवाजीराव सिंधिया की प्रतिमा के लोकार्पण का आयोजन, ग्वालियर सांसद को नहीं बुलाया गया। हालात ने यहां तक मोड़ लिया कि बीच में कुछ दिन तक सिंधिया ने ग्वालियर के मामलों से दूरी बना ली थी और खुद को सिर्फ अपने संसदीय क्षेत्र शिवपुरी गुना तक सीमित कर लिया था। रिश्तों में जमी बर्फ तब कुछ घुली जब इसी महीने सिंधिया और भारतसिंह ग्वालियर से बेंगलुरु के लिए शुरू नई ट्रेन को एक साथ हरी झंडी दिखाते नजर आए लेकिन नरेन्द्र सिंह के ताजा तंज ने फिर रिश्ते तल्ख कर दिए हैं।

ऑब्जर्बर की रिपोर्ट पर छत्रप हावी

प्रदेश कांग्रेस सदर के दिल्ली पहुंचते ही ग्वालियर चंबल संभाग में नए कांग्रेस जिलाध्यक्षों की सूची को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। खबर यही है कि जीतू , राहुल और खड़गे से मिल सकते हैं और उनकी सहमति मिलते ही अगस्त के पहले हफ्ते तक जिलाध्यक्षों की घोषणा का रास्ता साफ हो जाएगा। राष्ट्रीय महासचिव वेणुगोपाल के पास दावेदारों के पैनल पहले ही केंद्रीय और प्रदेश पर्यवेक्षकों ने पहुंचा दिए हैं। ग्वालियर शहर और देहात की अध्यक्षी के लिए छह छह नामों के पैनल भेजे गए हैं लेकिन ऑब्जर्बर की रिपोर्ट पर छत्रप हावी होते दिख रहे हैं। ग्वालियर चंबल संभाग में नियुक्तियां दिग्विजय सिंह के कोटे से होंगी तो जीतू, सिंघार, अरुण, अजय सिंह और कमलनाथ के लिए भी उनके प्रभाव क्षेत्र वाले जिले फिक्स कर दिए गए हैं।

एक और नेता पुत्र की लांचिंग की तैयारी

इन दिनों ग्वालियर में भाजपा हलकों में जिला नेतृत्व से लेकर कार्यकर्ता तक पत्रकारिता से राजनीति में आकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और दो बार राज्यसभा सदस्य रह चुके स्व. प्रभात झा की पहली पुण्यतिथि पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों में व्यस्त हैं। हालांकि यह आयोजन जिला इकाई के मार्गदर्शन में हो रहे हैं लेकिन तैयारियों की पूरी कमान दिवंगत नेता के बेटे तुष्मुल झा ने संभाल रखी है। प्रभातजी के जीवनकाल से ही तुष्मुल भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं लेकिन पार्टी में एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत के चलते तुष्मुल को अब तक न संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिली और न सत्ता में कहीं एडजस्ट हो सके।

प्रभात झा के असामयिक निधन के बाद अब तुष्मुल अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए तैयार हैं। हालांकि प्रथम पुण्यतिथि पर अटल सभागार में हो रहा यह पुण्य स्मृति समारोह किसी भी राजनीतिक निहितार्थ से दूर है लेकिन सियासी गलियारों में इस आयोजन को प्रदेश की राजनीति में एक और नेतापुत्र की लांचिंग बताया जा रहा है। सियासत के सफर में प्रभात झा के शिवराज सिंह से लेकर नरेन्द्र सिंह तक से बेहतर रिश्ते रहे और जीवन के उत्तरार्ध में उनके सिंधिया से भी ताल्लुक ठीक हो गए थे, लिहाजा तुष्मुल की राह में मुश्किल नहीं है लेकिन शिवराज, नरेंद्र सिंह और सिंधिया के सुपुत्रों का भी राजनीतिक रुझान छिपा नहीं है।

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