भारत-ईएफटीए के बीच व्यापार, आर्थिक साझेदारी समझौते का लागू होना ऐतिहासिक: गोयल

नयी दिल्ली, 01 अक्टूबर (वार्ता) वाणिज्य एवं उद्योग केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और यूरोप के चार देशों के मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच हुये व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (टेपा) के बुधवार को लागू होने के अवसर को ऐतिहासिक बताया है।

श्री गोयल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘ सचमुच एक ऐतिहासिक दिन है। इससे व्यापार, निवेश और रोज़गार सृजन के नए अवसर खुलेंगे, जिससे हमारे लोगों और व्यवसायों को लाभ होगा।” उन्होंने कहा कि इससे संबंधित पक्ष आर्थिक संबंधों को और मज़बूत करने के लिए मिलकर काम कर सकेंगे।

इस समझौते के लागू होने के अवसर पर ईएफटीए के सदस्य देश स्विटजरलैंड के आर्थिक मामलों, शिक्षा और अनुसंधान विभाग के प्रमुख गायॅ पार्मेलिन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, ‘ ईएफटीए और भारत के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) लागू हो रहा है। मैं अपने प्रिय सहयोगी पीयूष गोयल के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूँ ताकि स्विट्जरलैंड और भारतीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए नये अवसर विकसित किए जा सकें।”

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन और आइसलैंड की सदस्यता वाले ईएफटीए के साथ इस ऐतिहासिक समझौते को वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाज़ार पहुंच को बढ़ाने वाला, बौद्धिक संपदा अधिकारों को मज़बूत करने और मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत पहलों का समर्थन करते हुए सतत, समावेशी विकास को बढ़ावा देने वाला समझौता बताया है।

इस समझौते पर पिछले साल 10 मार्च को नयी दिल्ली में हस्ताक्षर किये गये थे। इसमें 14 अध्याय हैं, जो मुख्य रूप से वस्तु बाज़ार में प्रवेश, उत्पत्ति के नियम, व्यापार सुगमता, व्यापार उपाय, स्वच्छता और पादप स्वच्छता उपाय, व्यापार में तकनीकी बाधायें, निवेश प्रोत्साहन, सेवाओं पर बाज़ार में प्रवेश, बौद्धिक संपदा अधिकार, व्यापार और सतत विकास तथा अन्य कानूनी और क्षैतिज प्रावधानों पर केंद्रित है।

इसमें शत-प्रतिशत गैर-कृषि उत्पादों और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क को घटाने या समाप्त करने के प्रावधान शामिल हैं। मंत्रालय का कहना है कि फार्मा, चिकित्सा उपकरण और प्रसंस्कृत खाद्य आदि क्षेत्रों में भारत की ओर से बाजार पेशकश करते हुए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) से संबंधित संवेदनशीलता को ध्यान में रखा गया है।

निवेश और रोजगार प्रतिबद्धताओं से जुड़े टेपा के अनुच्छेद 7.1 के अनुसार, ईएफटीए के सदस्य देश 10 वर्ष में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में 50 अरब डॉलर तक की वृद्धि करेंगे और उसके बाद के पांच वर्षों में और 50 अरब डॉलर तक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लायेंगे।

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