जैविक खेती से बाज़ार तक की गारंटी, किसानों की अनदेखी नहीं चलेगी: संभाग आयुक्त

भोपाल: किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती से जोड़कर उन्हें बाज़ार, तकनीक और योजनाओं का पूरा लाभ दिलाने के उद्देश्य से संभागीय कार्यालय में अहम बैठक आयोजित की गई. बैठक में संभाग आयुक्त संजीव सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि किसानों के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जैविक और प्राकृतिक फसलों की बिक्री के लिए स्थायी और सुनिश्चित स्थान उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसानों को उत्पादन के बाद भटकना न पड़े.

संभाग आयुक्त ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चला रही हैं, ऐसे में ज़मीनी स्तर पर इनका शत-प्रतिशत क्रियान्वयन प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. बैंक लिंकेज, डीबीटी सहित सभी योजनाओं में लक्ष्य पूर्ण करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि किसान कल्याण से जुड़ी हर योजना का लाभ समय पर किसान तक पहुँचना चाहिए.
बीज से लेकर सिंचाई तक पारदर्शी व्यवस्था पर ज़ोर
बैठक में जिलों में मृदा परीक्षण और बीजों के प्रमाणीकरण की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि किसानों को जांच के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े और समय पर रिपोर्ट मिल सके. प्रमाणीकरण के आधार पर ही बुवाई करने से किसानों को नुकसान से बचाया जा सकेगा. साथ ही कृषि, तिलहन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, लघु सिंचाई योजनाओं के तहत स्प्रिंकलर-ड्रिप सिस्टम, किसान क्रेडिट कार्ड, कस्टम हायरिंग सेंटर जैसी योजनाओं में शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति के निर्देश दिए गए.
महिला किसानों और सहायक व्यवसायों को बढ़ावा
कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रमों में पशुपालन, मत्स्य, मंडी, सांची दुग्ध संघ और गैर-सरकारी संगठनों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया. कृषि विज्ञान केंद्रों की मदद से प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन जैसे सहायक व्यवसायों को बढ़ावा देने और महिला कृषक समूहों को संगठित कर उन्हें कृषि से जोड़ने की रणनीति पर चर्चा हुई.
सखी बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर और ई-टोकन व्यवस्था
सभी जिलों में प्राकृतिक खेती के लिए सखी बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर शीघ्र स्थापित किए जा रहे हैं. संभाग के 100 क्लस्टर में 200 सीआरपी के माध्यम से 12,500 किसानों का पंजीयन किया गया है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है.
आगामी सीजन में उर्वरक वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए ई-टोकन प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे लंबी कतारें, कालाबाजारी और अनियमित वितरण जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी.
पराली जलाने पर सख्ती, जागरूकता कैंप लगेंगे
नरवाई प्रबंधन के तहत पराली जलाने से रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष कैंप लगाने के निर्देश दिए गए. किसानों को कृषि यंत्रों के उपयोग के प्रति जागरूक कर पर्यावरण संरक्षण के साथ खेती को सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया.
बैठक में कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत कृषि एवं कृषि आधारित विभागों की योजनाओं की लक्ष्य पूर्ति और भौतिक प्रगति की विस्तृत समीक्षा भी की गई, ताकि किसानों का चहुंमुखी और टिकाऊ विकास सुनिश्चित किया जा सके

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