
सीहोर। जिले में तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने रबी सीजन की फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है. जावर, मेहतवाड़ा सहित कई गांवों में किसानों की मेहनत पर मौसम ने कहर बरपाया है. तेज हवाओं और ओलों की मार से खेतों में खड़ी गेहूं व चने की फसल को नुकसान पहुंचा है. ओलों की मार से फली के दाने झड़ गए और फलियां टूट गईं.
बीते कुछ दिन से मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा था. मंगलवार को दिन भर आसमान पर काले घने बादल छाए रहे. शाम को अचानक तेज हवाएं चलने लगीं और बादलों की तेज गडग़ड़ाहट के साथ बारिश का दौर शुरू हो गया. जिले के जावर क्षेत्र में पानी के साथ ओले भी जमकर बरसे. कई गांवों में किसानों की मेहनत पर ओलों ने पानी फैर दिया. महज 15 मिनट की तक चले आंधी तूफान और ओलों की बारिश से खेतों में खड़ी फसलें आड़ी हो गईं. मायूस किसान बेबस निगाहों से कुदरत की मार को देखता रहा. बुधवार की सुबह किसान जब अपने खेतों का जायजा लेने पहुंचे तो उनके दुख का ठिकाना न रहा. तीन महीने से रात- दिन खेत में मेहनत कर उगाई फसलें तेज हवाओं के चलते आड़ी हो गई थीं. इसके अलावा तेज बारिश और ओलों से फलियां टूट गई थीं तो चने के फूल झड़ गए थे. पलक झपकते अपनी मेहनत को बर्बाद होता देख किसान मायूस नजर आए.
बीती रात आसमान से बरसी आफत ने ग्राम मेहतवाड़ा, जावर, बिलपान, खटसुरा, इस्माइल खेड़ी, झिकड़ी, निजामड़ी, कुंडिया धागा, सेमली बारी,जावर जोड़, भाटी खेड़ा और मोहम्मदपुर सहित कई गांवों में फसलों को नुकसान पहुंचा है.
किसानों ने शासन, प्रशासन से जल्द ही फसल का सर्वे कर आर्थिक सहायता और बीमा राशि देने की गुहार लगाई है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जो फसल खेत में आड़ी हुई है उनमें दाने का आकर बहुत छोटा रहने से उत्पादन में गिरावट आएगी, वहीं चमक जाने से मंडियों में उपज का उचित भाव नहीं मिलेगा.
तहसीलदार ने कई गांवों में नुकसान का लिया जायजा
बीती रात हुई तेज बारिश व ओलावृष्टि के बाद बुधवार को जावर तहसीलदार ओमप्रकाश चोरमा नेराजस्व अमले के साथ गुराडिय़ा वर्मा, ग्वाला, ग्वाली, भानाखेड़ी, खटसुरा गांव में पहुंचकर फसलों का निरीक्षण किय.। किसानों से चर्चा कर कितना क्या बारिश, ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है उसकी जानकारी लेकर हर संभव मदद का भरोसा दिया. तहसीलदार ने बताया कि निरीक्षण का उद्देश्य प्रभावित किसानों की पहचान करना और नियम अनुसार मुआवजा सहायता सुनिश्चित कर फसलों के नुकसान का सटीक आंकलन करना है.
कुदरत की मार से बेहाल किसानों की व्यथा
जावर के किसान रामलाल पटेल ने बताया कि इस तरह की बारिश और ओले गिरना बहुत बड़ा नुकसान है. गेहूं की फसल खेत में बिछ गई है, अब पैदावार आधी भी हो पाएगी या नहीं, कहना मुश्किल है. मेहतवाड़ा गांव के किसान हुकुम सिंह मीणा का कहना है कि, तेज हवा और ओलों ने सरसों और चने की फसल बर्बाद कर दी. कई खेतों में तो पूरी फसल लेट गई है। सरकार अगर तुरंत सर्वे नहीं कराएगी तो किसानों पर भारी संकट खड़ा हो जाएगा.वहीं कुंडियाधागा गांव के किसान कैलाश यादव ने बताया ओलावृष्टि से चने और मसूर के दाने झड़ गए हैं. खेतों में पानी भर गया है.
फसलों को नहीं हुआ है नुकसान
बीती शाम बारिश, ओले से कुछ खेतों में थोड़ी बहुत फसल आड़ी हुई है. फसल को कोई नुकसान नहीं हुआ है. जो फसल आड़ी हुई है वह धूप निकली तो दो से तीन में वापस सही हो जाएगी. यदि भी कुछ नहीं हुआ तो आगे अमले से सर्वे कराएंगे, फिलहाल तो जिले में कहीं भी फसलों को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है.
एके उपाध्याय,
उप संचालक, कृषि
