नई दिल्ली | अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसने भारत की सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर डाल दिया है। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडर फैसल नदीम ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उसने कतर की राजधानी दोहा में हमास के शीर्ष नेतृत्व के साथ गुप्त बैठक की थी। इस बैठक में उसके साथ सैफुल्लाह कसूरी भी मौजूद था, जो जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है। लश्कर और हमास के बीच यह सीधा संपर्क दक्षिण एशिया और मध्य-पूर्व के आतंकी नेटवर्कों के एकीकरण की ओर इशारा कर रहा है, जो भारत के लिए एक गंभीर रणनीतिक खतरा बन सकता है।
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, फैसल नदीम और सैफुल्लाह कसूरी की मुलाकात हमास के वरिष्ठ नेता खालिद मशाल से हुई थी। नदीम, जो लश्कर के राजनीतिक मुखौटे ‘पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग’ (PMML) का सक्रिय सदस्य है, का यह बयान वैश्विक आतंकी संगठनों के बीच बढ़ते तालमेल की पुष्टि करता है। भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह गठजोड़ केवल वैचारिक नहीं, बल्कि हथियारों की तकनीक, फंड जुटाने और ऑपरेशनल अनुभव साझा करने तक फैला हो सकता है। हमास कमांडर नाजी जहीर की पाकिस्तान यात्राओं और लश्कर नेताओं के साथ मंच साझा करने की घटनाओं ने इस अघोषित गठबंधन पर मुहर लगा दी है।
भारत सरकार और खुफिया तंत्र इस उभरते ‘आतंकी एक्सिस’ को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, भारत इस मामले को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे वैश्विक मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहा है। चूंकि लश्कर और हमास दोनों ही अमेरिका और कई यूरोपीय देशों द्वारा प्रतिबंधित संगठन हैं, इसलिए उनके बीच का यह सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि वे कतर और पाकिस्तान के बीच हो रही इन संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं ताकि भविष्य में किसी भी संभावित हमले की साजिश को समय रहते विफल किया जा सके।

