भगवान के भक्त को मौत नहीं मिलता है मोक्ष

सीहोर। राजा परिक्षित की मृत्यु सात दिनों में निश्चित थी भागवत कथा भी सात दिनों में निश्चित है सप्ताह में भी सात दिन होते है. सबकी मृत्यु सात दिनों में ही निश्चित है आठवां दिन नहीं होता है इस लिए प्रभू की भक्ति मेंइतना मजबूत बना लो कि भगवान भक्त की इच्छा पूरी करने के लिए विवश हो जाए,उक्त उद्गार शुक्रवार को भागवत भूषण पंडित रविशंकर तिवारी ने व्यक्त किए.

हनुमान फाटक मंदिर कस्बा परिसर में श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन व्यास गादी से महाभारत प्रसंग, परिक्षित जन्म एवं शुकदेव आगमन प्रसंग सुनाते हुए पंडित रविशंकर तिवारी ने कहा कि प्रभू में किसी भी प्रकार से निष्ठा कम नहीं होनी चाहिए निष्ठा अगर कम हुई तो प्रभू नहीं मिलेंगे। नेमिशारण वन में 28 हजार संत निवास करते है इस लिए यह प्रभू संतों के लिए प्रगट होते हैं. संतों की सेवा का अवसर भगवान भी प्राप्त करने के लिए प्रयासरत होते है। उन्होने कहा कि भगवान के प्रसाद को लेकर भ्रम में नहीं रहना चाहिए उपवास में भी सभी देवी देवताओं का प्रसाद ग्रहण करना चाहिए ब्राहम्मा विष्णू महेश एक है इन में कोई अंतर नहीं है सब जग के पालनहार है। नारायण जी का भजन करलो रामजी या शिवजी का यह एकाकार है.पंडित रविशंकर तिवारी ने कहा कि मनोरथ पूरा करने के लिए भगवान में श्रद्धा जगानी होती है जब तक श्रद्धा नही होगी कुछ नहीं मिलेगा. प्रभू को बनावटी सजावटी भक्ति पसंद नहीं है. प्रभू को सरलता प्रेम समर्पण प्रिय हैङ पितरों को श्रद्धा से दिया गया जल शीघ्र प्राप्त होता है. जबकि अश्रद्धा दिखावटी प्रेम पितरों को परलोक में कष्ट ही देता है. इसलिए भक्ति भाव से भजन करते तर्पण करना चाहिए.

 

 

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