शिक्षा और स्वास्थ्य में सेवा भाव की पुनः आवश्यकता

इंदौर। सर संघ चालक मोहन राव भागवत ने आज कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र, जो पहले सेवा के प्रतीक थे, आज व्यवसाय का रूप ले चुके हैं। पहले शिक्षक छात्र की देखभाल को जिम्मेदारी मानते थे और वैद्य बिना बुलाए रोगी की मदद के लिए पहुँच जाते थे। आज शिक्षा ट्रिलियन डॉलर का उद्योग बन गई है, जबकि विद्यालय और सुविधाएं बढ़ने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण ज्ञान और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है।

समाज को ऐसी चिकित्सा व्यवस्था चाहिए जो सहज, सस्ती और सभी पद्धतियों को एक छत के नीचे उपलब्ध कराए। सेवा भावना से काम करने वाले डॉक्टर और शिक्षक ही समाज को सशक्त बना सकते हैं। अपना सुख, सबका सुख मानकर, आर्थिक सहयोग और संवेदनशील संवाद से लोगों की पीड़ा दूर की जा सकती है।

संघ प्रमुख गुरु जी सेवा न्यास के कैंसर अस्पताल के शुभारंभ मौके पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कम लागत में उपचार और अधिक से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाना ही सच्ची नारायण सेवा है। धन में अहंकार न लाकर, समाज के आवश्यक कार्यों में समय और श्रम देना ही हमारी जिम्मेदारी है। स्वयंसेवकों का यही प्रयास प्रशंसनीय है।

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