यूरोपीय संघ में शून्य या न्यूनतम शुल्क पर प्रवेश की छूट खत्म होने से 2.66 प्रतिशत माल पर असर : सरकार

नयी दिल्ली, 23 जनवरी (वार्ता) यूरोपीय संघ (ईयू) के बाजार में भारत के कुछ उत्पादों को शून्य या न्यूनतम शुल्क पर निर्यात की छूट खत्म होने को लेकर व्यक्त की जा रही चिंताओं के बीच सरकार ने आज स्पष्ट किया कि नयी व्यवस्था में वहां भारत से जाने वाले कुल माल का ज्यादा से ज्यादा 2.66 प्रतिशत माल प्रभावित होगा।

यूरोपीय संघ ने अल्पविकसित और निम्न मध्यम आय वर्ग के देशों को वरीयता के आधार पर बाजार प्रवेश देने की अपनी सामान्यीकृत प्रणाली (जीपीएस) में पहली जनवरी से किये गये बदलावों के बाद भारत को 12 वर्गों के कई उत्पादों पर जीएसपी के तहत मिलने वाला छूट बंद हो गयी है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को एक संक्षिप्त नोट में कहा कि नयी व्यवस्था में भारत अब चमड़ा और चमड़े के उत्पादों पर ही वहां जीपीएस का लाभ पाने का पात्र रह गया है।

नोट में 2023 में निर्यात के आंकड़ों के आधार पर कहा गया है कि भारत से वहां जाने वाला कुल 1.66 अरब डालर का निर्यात जीएसपी के लाभ से बाहर जो जाएगा जो उस साल वहां किये गये 62.2 अरब यूरो के निर्यात का लगभग 2.66 प्रतिशत है। संशोधित व्यवस्था में भी भारत को को 11.24 अरब यूरो के निर्यात पर वरीयता के आधार पर प्रवेश मिलेगा।

ईयू की नयी जीएसपी व्यवस्था में भारत सहित कुछ देशों के कुछ प्रकार के माल को जीएसपी की छूट खत्म कर दी गयी है। जनवरी 2026 से दिसंबर 2028 तक के लिए इस संशोधित व्यवस्था के तहत भारत 13 में से 12 प्रमुख उत्पाद वर्गों में जीएसपी लाभ की पात्रता से बाहर हो गया है।

इनमें खनिज उत्पाद, कार्बनिक एवं अकार्बनिक रसायन, प्लास्टिक और उसके उत्पाद, रबर और उसके उत्पाद, कपड़े, पत्थर के सामान, प्लास्टर, सीमेंट,ऐसबेस्टॉस, माइका और इस प्रकार की अन्य सामाग्री, सिरैमिक के सामान, ग्लास और ग्लास के सामान, मोती और महंगी धातु, लोहा, इस्पात तथा लोहा और इस्पात के सामान, बेस मेटल (लोहा और इस्ताप के अलावा), बेस मेटल से बने सामान, मशीनरी और मेडिकल उपकरण , इलेक्ट्रिक मशीनरी और उपकरण तथा उनके कल पुर्जे, रेलवे और ट्रामवे के इंजन, डिब्बे, मोटर वाहन, बाइसकिल, विमान और अंतरिक्षयान, पोत और नौकाएं शामिल हैं।

 

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