
जबलपुर। म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रस्तावित विद्युत दर वृद्धि के विरुद्ध किसानों के गैर-राजनीतिक, वर्गविहीन, राष्ट्रीय संगठन भारत कृषक समाज ने म.प्र. विद्युत नियामक आयोग, भोपाल में औपचारिक आपत्ति प्रस्तुत की है। उल्लेखनीय है कि आपत्ति प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 25 जनवरी 2026 निर्धारित है। भारत कृषक समाज महकौशल प्रांत के अध्यक्ष इंजी. के.के. अग्रवाल ने किसानों की ओर से आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि जब तक किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं पर्याप्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक विद्युत दरों में वृद्धि पर विचार करना न्यायसंगत नहीं है। विद्युत कंपनी द्वारा प्रस्तावित दर वृद्धि को सिरे से खारिज किया जाना चाहिए।
10 घंटे का प्रावधान, मिल रही 6-7 घंटे बिजली
उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति में स्पष्ट भेदभाव किया जा रहा है, जो विद्युत चार्टर का खुला उल्लंघन है। आपत्ति में यह भी उल्लेख किया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की लाइनें, खंभे, कट-आउट और ट्रांसफार्मर अत्यंत जर्जर अवस्था में हैं। अधिकांश ट्रांसफार्मर ओवरलोडेड हैं, जो बार-बार खराब होते हैं और महीनों तक सुधारे नहीं जाते। वोल्टेज की गंभीर समस्या के कारण किसानों की मोटरें जल जाती हैं। नियम अनुसार 10 घंटे विद्युत आपूर्ति का प्रावधान है, लेकिन वास्तव में केवल 6-7 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
हॉर्स पावर बढ़ाकर अवैध बिजली बिल वसूली
इंजी. अग्रवाल ने आरोप लगाया कि बिना जांच के कृषि पंपों की हॉर्स पावर बढ़ाकर अवैध बिजली बिल वसूली की जा रही है और इसी आधार पर सरकार से सब्सिडी भी हड़पी जा रही है।
आपत्ति में यह भी कहा गया कि कंपनी की लापरवाही से हो रहे लाइन लॉस, अनियंत्रित खर्च, अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का बोझ उपभोक्ताओं पर डालना पूरी तरह अनुचित है।
