
भोपाल। राज्य प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षणरत भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के पाँच अधिकारियों ने शुक्रवार को पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से सौजन्य भेंट की। यह संवाद प्रशासनिक अनुभवों के आदान-प्रदान, आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श तथा विभिन्न सेवाओं के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
डीजीपी मकवाणा ने अधिकारियों का स्वागत करते हुए उन्हें मध्यप्रदेश पुलिस की संगठनात्मक संरचना, कार्यप्रणाली और दायित्वों की जानकारी दी। उन्होंने कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण, अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध अभियानों तथा तकनीक आधारित पुलिसिंग में किए जा रहे नवाचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
नैतिक आचरण पर जोर देते हुए डीजीपी ने कहा कि सार्वजनिक सेवा में प्रवेश के साथ ही ईमानदारी और निष्पक्षता अनिवार्य हो जाती है। उन्होंने कहा कि सत्यनिष्ठा और निष्पक्ष कार्य ही किसी अधिकारी की विश्वसनीयता और जन-विश्वास की वास्तविक आधारशिला होते हैं तथा निस्वार्थ सेवा ही लोकसेवा का सार है।
दुर्ग, मुरैना और बस्तर में अपनी प्रारंभिक पदस्थापना के अनुभव साझा करते हुए मकवाणा ने शुरुआती चुनौतियों और निरंतर आत्म-प्रेरणा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता, उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुनना और समस्याओं को समझना प्रभावी नेतृत्व की पहचान है। मंदसौर के कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक निर्णय में त्वरित, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई से जन-विश्वास मजबूत होता है।
डीजीपी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को इस सीखने के दौर का पूरा लाभ उठाने, आवश्यकता पड़ने पर वरिष्ठों से मार्गदर्शन लेने, आधुनिक तकनीक अपनाने और पूरी निष्ठा व प्रतिबद्धता के साथ कर्तव्य निर्वहन की सलाह दी।
आईएफएस अधिकारियों ने अपने प्रशिक्षण अनुभव साझा करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की कूटनीतिक भूमिका और राज्य स्तर पर मजबूत आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने मध्यप्रदेश पुलिस की जनहितकारी पहलों और नवाचारों की सराहना की।
इस अवसर पर डीजीपी के पीएसओ विनीत कपूर, एसओ मलय जैन उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम का संचालन विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी नेहा भारतीय ने किया।
