वॉशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी में शांति और पुनर्निर्माण के लिए एक क्रांतिकारी अंतरराष्ट्रीय निकाय ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) के गठन की घोषणा की है। ट्रंप खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे, जिसमें ब्रिटिश पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और जेरेड कुशनर जैसे दिग्गज शामिल रहेंगे। आलोचक इसे ट्रंप का अपना ‘यूनाइटेड नेशंस’ कह रहे हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र (UN) की भूमिका को चुनौती दे सकता है। इस बोर्ड का प्राथमिक उद्देश्य गाजा का विसैन्यीकरण करना और वहां एक विशेषज्ञों पर आधारित अंतरिम सरकार का गठन करना है।
इस नए वैश्विक मंच में ट्रंप ने भारत, पाकिस्तान और वियतनाम जैसे देशों को भी सदस्यता का न्योता दिया है। हालांकि, स्थायी सदस्यता के लिए एक कड़ी शर्त रखी गई है; तीन साल से अधिक की सदस्यता चाहने वाले देशों को गाजा के पुनर्निर्माण कोष में 1 बिलियन डॉलर (लगभग 8,300 करोड़ रुपये) का योगदान देना होगा। जो देश यह राशि नहीं देंगे, उनकी भागीदारी केवल तीन वर्षों तक सीमित रहेगी। ट्रंप की इस 20-सूत्रीय योजना का लक्ष्य गाजा में अगले दो वर्षों के भीतर स्थिरता लाना और मानवीय सहायता के वितरण को सीधे अमेरिकी निगरानी में लेना है।
ट्रंप ने गाजा के लिए एक त्रि-स्तरीय प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है, जिसमें ‘बोर्ड ऑफ पीस’ सबसे शीर्ष पर होगा, जबकि मध्य स्तर पर तुर्की, कतर और मिस्र जैसे देशों का ‘गाजा कार्यकारी बोर्ड’ कार्य करेगा। सबसे निचले स्तर पर स्थानीय फिलिस्तीनी विशेषज्ञों की ‘नेशनल कमेटी’ प्रशासनिक काम संभालेगी। हालांकि, इजरायल ने इस योजना पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि इस बोर्ड के गठन में उनसे उचित समन्वय नहीं किया गया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप का यह ‘हजारों करोड़ का प्लान’ गाजा में स्थायी शांति ला पाएगा या यह वैश्विक कूटनीति में एक नया विवाद खड़ा करेगा।

